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जनमेजय ने जब किया नागों के नाश

जनमेजय ने जब किया नागों के नाश

यह यज्ञ बहुत ही भयानक था नाग मंत्रो के उच्चारण से खुद ही आ कर मरते थे
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जनमेजय ने जब किया नागों के नाश का यज्ञ तो बचकर निकल गए थे ये दो सर्प
जनमेजय अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित के पुत्र थे। राजा परीक्षित अभिमन्यु के पुत्र थे। जन्मेजय को जब यह पता चला कि मेरे पिता की मृत्यु तक्षक नामक सर्प के दंश से हुई तो उन्होंने विश्व के सभी सर्पों को मारने के लिए नागदाह यज्ञ करवाया। उन यज्ञों की अग्नि में नागों को पटक दिया जाता था। एक विशिष्ट मंत्र द्वारा नाग स्वयं यज्ञ के पास पहुंच जाते थे। देशभर में नागदाह नामक स्थान मिल जाएंगे। संभवत: नागों के दाह से जुड़ा होने के कारण ही यह नाम होंगे। हालांकि उन्होंने यह यज्ञ कहां किया था यह शोध का विषय है।
ये सर्प बचकर निकल गए थे?
कर्कोटक : ऐसी मान्यता है कि सर्पदाह के एक घनघोर यज्ञ की अग्नि से एक कर्कोटक नामक सर्प ने अपनी जान बचाने के लिए उज्जैन में महाकाल राजा की शरण ले ली थी जिसके चलते वह बच गया था। कर्कोटक शिव भक्त भी था। शिवजी की स्तुति के कारण कर्कोटक जनमेजय के नाग यज्ञ से बच निकले थे और उज्जैन में उन्होंने शिव की घोर तपस्या की थी। कर्कोटेश्वर का एक प्राचीन उपेक्षित मंदिर आज भी चौबीस खम्भा देवी के पास कोट मोहल्ले में है। हालांकि वर्तमान में कर्कोटेश्वर मंदिर माता हरसिद्धि के प्रांगण में है।
तक्षक : जब लाखों सर्प यज्ञ की अग्नि में गिरने प्रारंभ हो गए, तब भयभीत तक्षक ने इन्द्र की शरण ली। वह इन्द्रपुरी में रहने लगा। वासुकि की प्रेरणा से एक ब्राह्मण आस्तीक परीक्षित के यज्ञस्थल पर पहुंचा और यजमान तथा ऋत्विजों की स्तुति करने लगा। उधर जब ऋत्विजों ने तक्षक का नाम लेकर आहुति डालनी प्रारंभ की तब मजबूरी में इन्द्र ने तक्षक को अपने उत्तरीय में छिपाकर वहां लाना पड़ा। वहां वे तक्षक को अकेला छोड़कर अपने महल में लौट गए। विद्वान् ब्राह्मण बालक आस्तीक से प्रसन्न होकर जनमेजय ने उसे एक वरदान देने की इच्छा प्रकट की तो उसने वरदान में यज्ञ की तुरंत समाप्ति का वर मांगा। बस इसी कारण तक्षक भी बच गया क्योंकि उसके नाम के आह्वान के समय वह बस अग्नि में करने ही जा रहा था और यज्ञ समाप्ति की घोषणा कर दी गई।
कर्कोटक कौन था?
कर्कोटक शिव भक्त भी था। ऋषि कश्यप की पत्नीं कद्रू के हजारों पुत्रों में सबसे बड़े और सबसे पराक्रमी शेष नाग ही थे। कर्कोटक शेषनाग के छोटे भाई थे। कर्कोटक और ऐरावत नाग कुल का इलाका पंजाब की इरावती नदी के आसपास का माना जाता है। कर्कोटक शिव के एक गण और नागों के राजा थे। नारद के शाप से वे एक अग्नि में पड़े थे, लेकिन नल ने उन्हें बचाया और कर्कोटक ने नल को ही डस लिया, जिससे राजा नल का रंग काला पड़ गया। लेकिन यह भी एक शाप के चलते ही हुआ तब राजा नल को कर्कोटक वरदान देकर अंतर्ध्यान हो गए।
यज्ञ चिकित्सा क्या है ?

यज्ञ चिकित्सा क्या है ?

यज्ञ चिकित्सा क्या क्या है ? :- आयुर्वेद के विभिन्न ग्रंथों के प्रयोग से जो अग्नि में औषधी डालकर धूनी से ठीक होते है वह भी यज्ञ चिकित्सा का रूप है।
नीम के पत्ते, वच, कूठ, हरण, सफ़ेद सरसों, गूगल के चूर्ण को घी में मिलाकर धूप दें इससे विषमज्वर नष्ट हो जाता है।
मकोय के एक फल को घृत लगाकर आग पर डालें उसकी धूनी से आँख से कर्मी निकलकर रोग नष्ट हो जाते है।
अगर, कपूर, लोवान, तगर, सुगन्धवाला, चन्दन, राल इनकी धूप देने से दाह शांत होती है।
अर्जुन के फूल बायविडंग, कलियारी की जड़, भिलावा, खस, धूप सरल, राल, चन्दन, कूठ समान मात्रा में बारीक़ कुटें इसके धूम से कर्मी नष्ट होते है। खटमल तथा सिर के जुएं भी नष्ट हो जाते है
सहजने के पत्तों के रस को ताम्र पात्र में डालकर तांबे की मूसली से घोंटें घी मिलाकर धूप दें। इससे आँखों की पीड़ा अश्रुस्राव आंखो का किरकिराहट व शोथ दूर होता है।
असगन्ध निर्गुन्डी बड़ी कटेरी, पीपल के धूम से अर्श (बवासीर) की पीड़ा शांत होती है। महामारी प्लेग में भी यज्ञ से आरोग्य लाभ होता है।
हवन से रोग के कीटाणु नष्ट होते है। जो नित्य हवन करते हैं उनके शरीर व आसपास में ऐसे रोग उत्पन्न ही नहीं होते जिनमें किसी भीतरी स्थान से पीव हो। यदि कहीं उत्पन्न हो गया हो तो वह मवाद हवन गैस से शीघ्र सुख जाता है और घाव अच्छा हो जाता है।
हवन में शक्कर जलने से हे फीवर नहीं होता।
हवन में मुनक्का जलने से टाइफाइड फीवर के कीटाणु नष्ट हो जाते है।
पुष्टिकारक वस्तुएं जलने से मिष्ठ के अणु वायु में फ़ैल कर अनेक रोगों को दूर कर पुष्टि भी प्रदान करते है।
यज्ञ सौरभ महौषधि है। यज्ञ में बैठने से ह्रदय रोगी को लाभ मिलता है।
गिलोय के प्रयोग से हवन करने से कैंसर के रोगी को लाभ होने के उदहारण भी मिलते है।
गूगल के गन्ध से मनुष्य को आक्रोश नहीं घेरता और रोग पीड़ित नहीं करते ।
गूगल, गिलोय, तुलसी के पत्ते, अतीस, जायफल, चिरायते के फल सामग्री में मिलाकर यज्ञ करने से मलेरिया ज्वर दूर होता है।
गूगल, पुराना गुड, केशर, कपूर, शीतलचीनी, बड़ी इलायची, सौंठ, पीपल, शालपर्णी पृष्ठपर्णी मिलाकर यज्ञ करने से संग्रहणी दूर होती है।
चर्म रोगों में सामग्री में चिरायता गूगल कपूर, सोमलता, रेणुका, भारंगी के बीज, कौंच के बीज, जटामांसी, सुगंध कोकिला, हाउवेर, नागरमौथा, लौंग डालने से लाभ होता है।
जलती हुई खांड के धुंए में वायु शुद्ध करने की बड़ी शक्ति होती है। इससे हैजा, क्षय, चेचक आदि के विष शीघ्र नष्ट हो जाते है।
डा. हैफकिन फ़्रांस के मतानुसार घी जलने से चेचक के कीटाणु मर जाते है। घी और केशर के हवन से इस महामारी का नाश हो सकता है।
शंख वृक्षों के पुष्पों से हवन करने पर कुष्ठ रोग दूर हो जाते है।
अपामार्ग के बीजों से हवन करने पर अपस्मार (मिर्गी) रोग दूर होते है।
ज्वर दूर करने के लिए आम के पत्ते से हवन करें।
वृष्टि लाने के लिए वेंत की समिधाओं और उसके पत्रों से हवन करें।
वृष्टि रोकने के लिए दूध और लवण से हवन करें।
ऋतू परिवर्तन पर होने वाली बहुत सि बीमारियां सर्दी जुकाम मलेरिया चेचक आदि रोगों को यज्ञ से ठीक किया जा सकता है।
अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020 रविवार

अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020 रविवार

घर की सुख-समृद्धि के लिए क्या करें और क्या न करें
किसी भी काम की शुरुआत के लिए अक्षय तृतीया शुभ है
श्रेष्ठ मुहूर्त, इस दिन जरूरतमंद लोगों को करें अनाज का दान
26 अप्रैल को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया है। इसे अक्षय तृतीया और आखा तीज कहा जाता है। इस दिन किए गए दान का अक्षय यानी कभी नष्ट न होने वाला पुण्य फल मिलता है। इस तिथि का महत्व काफी अधिक है, क्योंकि ये साल के 4 अबूझ मुहूर्तों में से एक है। देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी और भड़ली नवमी के साथ ही अक्षय तृतीया को भी अबूझ मुहूर्त माना गया है।
परशुराम की जन्म तिथि
वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि इस तिथि पर अष्ट चिरंजीवियों में से एक परशुराम का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के नर-नरायण, हयग्रीव अवतार भी इसी तिथि पर हुए थे। त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी शुभ तिथि से मानी जाती है। इस दिन विष्णुजी के साथ महालक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए।

अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्‍मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन मां लक्ष्‍मी के साथ महालक्ष्‍मी यंत्र की पूजा भी की जाती है.
– सबसे पहले एक लाल रंग का आसन बिछाएं और इसके बीचों बीच मुट्ठी भर अनाज रखें.
– अनाज के ऊपर स्‍वर्ण, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश रखें. इस कलश में तीन चौथाई पानी भरें और थोड़ा गंगाजल मिलाएं.
– अब कलश में सुपारी, फूल, सिक्‍का और अक्षत डालें. इसके बाद इसमें आम के पांच पत्ते लगाएं.
– अब पत्तों के ऊपर धान से भरा हुआ किसी धातु का बर्तन रखें.
– धान पर हल्‍दी से कमल का फूल बनाएं और उसके ऊपर मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा रखें. साथ ही कुछ सिक्‍के भी रखें.
– कलश के सामने दाहिने ओर दक्षिण पूर्व दिशा में भगवान गणेश की प्रतिमा रखें.
– अगर आप कारोबारी हैं तो दवात, किताबें और अपने बिजनेस से संबंधित अन्‍य चीजें भी पूजा स्‍थान पर रखें.
– अब पूजा के लिए इस्‍तेमाल होने वाले पानी को हल्‍दी और कुमकुम अर्पित करें.
– इसके बाद इस मंत्र का उच्‍चारण करें
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलिए प्रसीद प्रसीद |
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मिये नम: ||
इस तिथि पर दान जरूर करना चाहिए
अक्षय तृतीया पर किए गए दान का अक्षय पुण्य मिलता है। इस दिन जौ, गेहूं, चना, दही, चावल, फलों का रस, दूध से बनी मिठाई, सोना और जल से भरा कलश, अनाज आदि चीजों का दान करना चाहिए। अभी गर्मी का समय है, ऐसे में छाता और जूते-चप्पल का दान भी करना चाहिए। अक्षय पर पितरों के लिए विशेष पूजा-पाठ करनी चाहिए।
घर पर ही पानी में तिल डालकर नहाएं।
इस पर्व पर चावल बनाकर पितरों को धूप दें।
सुबह पीपल के पेड़ पर जल और कच्चा दूध चढ़ाएं।
पितरों की तृप्ति के लिए संकल्प लेकर अन्न और जल का दान करें।
ब्राह्मण भोजन करवाएं या किसी मंदिर में 1 व्यक्ति के जितना भोजन दान करें।
बनाए गए भोजन में से सबसे पहले गाय फिर कुत्ते और फिर कौवे के लिए हिस्सा निकालें।
अक्षय तृतीया पर कौन-कौन से काम न करें
अक्षय तृतीया पर घर में क्लेश नहीं करना चाहिए। इस दिन घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। वाद-विवाद से बचें। नशा न करें। धर्म के अनुसार कर्म करें। अधार्मिक कर्म करने वाले लोगों को अक्षय तृतीया पर किए गए दान-पुण्य का पूरा फल नहीं मिल पाता है।

कैसे जाने घर मे नेगेटिव ऊर्जा है?

कैसे जाने घर मे नेगेटिव ऊर्जा है?

कैसे जाने घर मे नेगेटिव ऊर्जा है?
घर मे प्रवेश करते ही आप को उदासी महसूस हो,
घर मे रहते हुए हर पल आलस्य आता हो और घर से बाहर निकलते ही आप स्फूर्ति महसूस करें,
कुछ अच्छा न लगता हो, अक्सर बिना किसी बड़ी बात के भी घर मे चिड़चिड़ का माहौल बन जाये,
संध्या समय भय महसूस हो,
किचन में अक्सर बर्तन गिरे और उनकी कर्कश आवाज हो,
घर की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं जल्दी-जल्दी खराब हो जाएं,
तुलसी का या अन्य कोई पौधा आप घर मे लगाएं और वह बार-बार सूख जाए,
घर मे अजीब जी महक आती हो और ढूंढने पर उसका सोर्स न मालूम पड़े,
घर में होने पर नेगेटिव सोच ज्यादा आये, घर मे ज्यादा समय बिताने वाले को अत्यधिक गुस्सा आये,
पूजा-पाठ में मन न लगना,
अक्सर मूड खराब रहना,
घर मे लगातार किसी न किसी का बीमार होते रहना,
रात्रि को नींद न आना,
घर मे कोई चीज अचानक गुम हो जाये फिर कितना भी ढूंढने से न मिले अचानक से दूसरे दिन मिल जाये, इस तरह की चीजें अगर लगातार हो रही हों तो यह निश्चित है कि आप के घर में नेगेटिव ऊर्जा है।
हम सभी जानते हैं कि दो तरह की ऊर्जा होती है सकारात्मक व नकारात्मक। हमारे जीवन को यही ऊर्जाएं सुख और दुख देने के लिए जिम्मेदार होती हैं इनका हमारे ऊपर बहोत ही गहरा प्रभाव होता है। हमारे घर में नकारत्मक ऊर्जा होने के कई कारण होते हैं?
जैसे- घर में वास्तु दोष का होना,
ग्रहदेव बृहस्पति का प्रभाव न्यून होना,
घर मे फालतू के समान जिनका उपयोग न हो पड़े रहना,
बिना धोए हुए कपड़े, गंदे बिस्तर बदबूदार तकिये होना,
दरवाजे पे जुते-चप्पल का ढेर होना खासकर ऐसे जुते-चप्पल जिनका प्रयोग हम नहीं करते,
घर के ज्यादातर मेंबर्स की कुंडली में अशुभ राहु की दशा एक साथ चलना,
घर मे प्रेत बाधा अथवा आत्माओं का साया होना,
घर में बंद घड़ियां पड़ी होना,
कई-कई महीने किचन की सफाई नहीं होना, रात भर सिंक में जूठे बर्तनों का रहना,
फ्रिज में गुथा हुआ आँटा रात्रि में रखना, घर मे मिठाई रखना ( मिठाइयों के पीछे बुरी शक्तियां घर में आती हैं ) ,
घर मे बिल्ली पाली हुई होना,
ऐसे अनेक कारण हो सकते हैं घर मे नकारात्मक ऊर्जा होंने के अगर आप को ऐसा लगे कि आप का घर नेगेटिव ऊर्जा के चपेट में आ गया है तो नीचे लिखे कुछ उपाय करें आप को राहत जरूर मिलेगी, किसी अच्छे वास्तुशास्त्री से संपर्क करें, उनकी सलाह लें और बताए हुए उपाय पे अमल करें आप को पॉजिटिव परिवर्तन महसूस होगा।
घर मे नित्य 21 दिन समुद्री नमक का पोंछा लगाएं गुरुवार को छोड़कर।
घर के सारे समान को व्यवस्थित करें जो जरूरत का सामान न हो उसे कबाड़ में बेच दें या फेक दें।
घर के जाले समय-समय पर साफ करें।
घर के जो फर्नीचर जगह से खिसकाए जा सकें उन्हें महीने में एक बार जगह से एक सेंटीमीटर इधर-उधर खिसका दें।
कांच के गिलास में पानी भरकर उसमे एक नींबू डालें और उत्तर दिशा में रख दें, और हर शनिवार पानी बदल दें।
घर के मुख्य जगहों पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाएं।
संध्या समय पूजा के संमय आरती करें और जोर-जोर से ताली बजाएं।
नित्य सुगंधित जड़ी-बूटियों की धूप जलाएं ऐसा करने से घर मे पैर पसारे नकारात्मक ऊर्जा को जाना होगा।
घर मे तुलसी के पौधे लगाए व तुलशी के अर्क अथवा तेल को पानी की बोतल में कुछ बूंद डालकर घर में छिड़कें।
इस तरह के बहोत उपाय हैं जो नकारात्मक ऊर्जा को भगाने में सहायक हैं आप पूरे विश्वास के साथ इन्हें अपनाएं इनसे बहोत ही उत्साहवर्धक परिणाम मिलेंगे

आध्यात्म में दिव्यशक्ति

आध्यात्म में दिव्यशक्ति

आध्यात्म में दिव्यशक्ति
आध्यात्म में दिव्यशक्ति शब्द का उपयोग जीवन-शक्ति के लिए किया जाता है, जिसके सात प्रकार हैं। हमारे भीतर सात चक्र हैं, जिनके माध्यम से वह शक्ति भी सात रूपों में प्रकट होती है।
मूलाधार चक्र से जब वह प्रकट होती है तो हम उसे शारीरिक शक्ति कह सकते हैं। स्वाधिष्ठान चक्र से जब जीवन-शक्ति प्रकट होती है तो वह काम-शक्ति कहलाती है। ऐसे ही, शक्ति यदि मणिपुर-चक्र से प्रकट हो तो प्राण-शक्ति के रूप में अभिव्यक्त होती है। वही शक्ति चौथे चक्र यानी अनाहत चक्र से प्रकट होने पर प्रेम शक्ति बन जाती है।
पांचवें विशुद्धि चक्र से वही विचार या मन की शक्ति बन जाती है। छठें यानी आज्ञा-चक्र से जीवन की शक्ति संकल्प का रूप लेती है। सातवें सहस्नर चक्र से वह चेतन या दिव्यशक्ति के रूप में अभिव्यंजित होती है।
जीवन-शक्ति के प्रकट होने के ये अलग-अलग सात ढंग हैं। शक्ति की ये सभी अभिव्यक्तियां- काम से लेकर राम तक- जीवन के लिए उपयोगी हैं। जैसे सूरज की श्वेत किरणों प्रिज्म से गुजर कर सात रूपों में विभक्त हो जाती हैं, ठीक वैसे ही हमारी जीवन-शक्ति भी इन सात चक्रों से गुजरकर विविध अभिव्यक्तियां देती है। शक्ति का विज्ञान हमारी शक्ति का स्रोत भोजन होता है, जिससे प्राप्त शक्ति शरीर में संग्रहित होती है।
गहन निद्रा की स्थिति में यह शक्ति संरक्षित होती है। सामान्य जागरण अर्थात दैनिक क्रियाकलापों में शक्ति खर्च होती है। प्राणायाम और व्यायाम से शक्ति जगती है। धारणा से शक्ति केंद्रित होती है और ध्यान से उर्ध्वगामी होती है।
काम, क्रोध, लोभ आदि वासनाओं में शक्ति अधोगामी होती है। दुख में, चिंता में, भय में शक्ति सिकुड़ती है। प्रेम में, प्रसन्नता में, आनन्द में शक्ति फैलती है। समाधि में शक्ति, ब्रह्म की परम शक्ति के साथ एकाकार हो जाती है। शक्ति का पूरा विज्ञान यही है। इस पूरे विज्ञान को समझकर ही कोई जीवनशक्ति का सदुपयोग करना सीख सकता है।
शक्ति जगाने में व्यायाम और प्राणायाम बहुत उपयोगी हैं। योग की साधना में इन दोनों का बहुत उपयोग किया गया है। ध्यान की जितनी भी विधियां हैं, वे सब शक्ति को ऊर्ध्वगामी यानी ऊपर की ओर संचालित करने के उपाय हैं।
चक्रों को संतुलित करने के लिए आवश्यक तेल
सुंदर हर किसी ने चक्रों के बारे में सुना है। हालाँकि मुझे लगता है कि बहुत से लोग वास्तव में स्पष्ट नहीं हैं कि वे क्या हैं या उनका कार्य क्या है।
मुझे समझाएं: चक्र मानव शरीर के भीतर ऊर्जा केंद्र हैं जो अंग प्रक्रिया से लेकर प्रतिरक्षा प्रणाली और भावनाओं तक, इसकी सभी प्रक्रियाओं को विनियमित करने में मदद करते हैं।
सात मुख्य चक्र हैं जो आपके पूरे शरीर में, आपकी रीढ़ के आधार से लेकर आपके सिर के मुकुट तक स्थित हैं। प्रत्येक चक्र की अपनी कंपन आवृत्ति, रंग और विशिष्ट कार्य होते हैं।
अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में संतुलन हासिल करने के लिए, आपके चक्रों को संतुलित और संरेखित करने की आवश्यकता है। आवश्यक तेल आपको उस संतुलन को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।
First Chakra — Root Chakra
Patchouli Essential Oil
Second Chakra — Sacral Chakra
Neroli Essential Oil
Third Chakra — Solar Plexus Chakra
Pine Essential Oil
Fourth Chakra — Heart Chakra
Rosewood or Rose Essential Oil
Fifth Chakra — Throat Chakra
Lavender Essential Oil
Six Chakra — Third Eye Chakra
Sandalwood Essential Oil
Seventh Chakra — Crown Chakra
Lime Essential Oil

वास्तु जीवन के सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए आवश्यक हैं

वास्तु जीवन के सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए आवश्यक हैं

वास्तु जीवन के सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए आवश्यक हैं
वास्तु के सिध्दांतो को अपनाकर 3-8 महिनों में सलाह के कार्यान्वयन से आपको और आपके परिवार के लिए हम सफलता सुनिश्चित करते हैं ।

हर घर / कार्यालय के जीवन से संबंधित विभिन्न वर्ग हैं जिसमें मुख्य हैं धन, स्वास्थ्य, व्यवसाय, शिक्षा, विवाह और रिश्ते ।
ऊर्जा और दिशाओं के बीच उच्चस्तर का सहसंबंध है जिसकी वजह से या तो व्यक्ति अपने सफलता के शिखर तक पहुँचता है और खुशी लाता है या फिर पूरा जीवन मानसिक तनाव तत्था मानसिक आघात में व्यतित करता है ।
सम्पदा, स्वास्थ्य, कैरियर, शिक्षा, विवाह और रिश्तों से संबंधित विषयों की समस्याओं के केन्द्र में किसी व्यक्ति के लिए प्रतिकूल दिशाओं के प्रभाव के कारण आपके सात चक्र में असंतुलन होता है।
जब मनुष्य के चारों और सकारात्मक उर्जा का वास होता है, और वे अपनी अनुकूल दिशाओं के पथ पर चलते हैं तो सातों चक्र चैनलबद्ध और सक्रिय हो जाते हैं जिससे निरन्तर प्रसन्नतापूर्वक जीवन बिताया जा सकता है।
आपके सातों चक्रों को खोलना और उर्जा के स्वस्थ प्रवाह को अनुमत करना संतुलित बने रहने, अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने और सकारात्मक विचारों का एक सशक्त माध्यम है।
चक्र भिन्न भिन्न रंगों के विद्युतीय उर्जा के घूमते हुए पहिए हैं जो हमारे उर्जा क्षेत्रों, शरीर और विस्तृत ब्रहाण्डीय उर्जा क्षेत्र को कनेक्ट करते हुए अनेक कार्य करते हैं।
अपनी अनुकूल दिशाओं के साथ सामजस्य स्थापित करके आप अपने प्रयासों में सफलता हासिल कर सकते हैं।
वास्तु- प्रत्येक व्यक्ति के लिए विशिष्ट”
वास्तु की संकल्पना व्यक्ति के घर (अपना/किराए का)/ कार्य स्थल, घर/ कार्यस्थल की दिशाओं और उर्जा के प्रवाह से नियंत्रित होती है।
कुल आठ दिशाएं यानि उत्तर, दक्षिण, पूर्व, और पश्चिम दिशाएं हैं जिन्हें आधारभूत दिशाएं कहा जाता है और वे बिन्दु जहां पर दो दिशाएं मिलती हैं उन्हें अंतर-आधारभूत या आधारभूत बिन्दु कहा जाता है जैसे उत्तर पूर्व (एनई), दक्षिण पूर्व (एसई), दक्षिण पश्चिम (एसडब्ल्यू) और उत्तर पूर्व (एनडब्ल्यू)।
हर व्यक्ति की उसके जन्म की तारीख के अनुसार चार अनुकूल और चार प्रतिकूल दिशाएं होती हैं।
किसी व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों के सात चक्र चार अनुकूल और चार प्रतिकूल दिशाओं से नियंत्रित होते हैं। सरल वास्तु में उर्जा और सात चक्रों पर प्रभाव का मूल्याकंन किया जाता है और इसके आधार पर चिंता युक्त पहलूओं का पूर्वानुमान व्यक्त किया जाता है, जो घर (अपना/किराए का) /कार्यस्थल की दिशाओं पर आधारित होता है।
इस आकलन के आधार पर, चिंता से जुड़े पहलूओं को कम करने के लिए सलाह दी जाती है जिसमें किसी प्रकार का अवसंरचनात्मक परिवर्तन शामिल नहीं होता है।
घर/कार्य स्थल के संबंध में दिशा की अनुकूलता का आकलन करने के लिए परिवार के मुखिया की जन्म की तारीख (परिवार के लिए मुख्य आय अर्जक) पर विचार किया जाता है।
हर घर/कार्यस्थल में वास्तु के सिद्धांतों का अनुपालन करके आप शांति, प्रसन्नता, सम्पन्नतता, अच्छा स्वास्थ्य, शिक्षा और चुने गए पेशे में सफलता, पुराने कानूनी विवादों का निपटान, निसंतान दम्पत्तियों द्वारा संतान प्राप्त करने में सहायता पा सकते हैं।
इसलिए आपके लिए यह उपयुक्त समय है क्योंकि आप वास्तु को अपनाने की दिशा में पहला कदम उठा कर जीवन के हर पहलू में प्रसिद्धि, सफलता और प्रसन्नता पाने के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं।
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चक्र कंगन लाभ और अर्थ

चक्र कंगन लाभ और अर्थ

चक्र कंगन लाभ और अर्थ
एक प्राकृतिक लावा स्टोन 7 चक्र हीलिंग कंगन पहनने के लाभ अंतहीन हैं और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह आपको अपने 7 चक्रों के प्रति जागरूकता लाने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में अभिनय करने के लिए उन्हें हर समय खुला रखने में मदद करता है।
आइए इन 7 चक्र ब्रेसलेट के लाभों को समझें और बताएं कि क्या है और आपके चक्रों को खुला और संतुलित करने की आवश्यकता क्यों है!
संस्कृत शब्द चक्र का शाब्दिक अर्थ है “पहिया”। योग और ध्यान में यह आपके पूरे शरीर में पहियों का जिक्र है जो आपके पूरे शरीर में ऊर्जा में बदल जाता है। सात मुख्य चक्र हैं जो रीढ़ को संरेखित करते हैं और आपकी रीढ़ के आधार पर शुरू होते हैं और अपने सिर के मुकुट के माध्यम से सभी तरह से ऊपर जाते हैं।
आपके प्रत्येक सात चक्रों में नसों और प्रमुख अंगों के साथ-साथ होने के कई मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक राज्य होते हैं। यह बेहद आयात है
एक चक्र को पहले खुला रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन इतना मुश्किल नहीं जब आपको इसे खुला रखने की जागरूकता हो। यही वह जगह है जहाँ हमारे 7 चक्र हीलिंग लावा कंगन खेलने में आता है। रंगीन पत्थरों में से प्रत्येक एक अलग चक्र का प्रतिनिधित्व करता है और आप अपने चक्रों को खुला और स्वस्थ रखने में अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए कंगन का उपयोग कर सकते हैं।
आपका मन, शरीर और आत्मा सभी एक सुंदर गोलाकार तरीके से जुड़े हुए हैं और प्रत्येक चक्र के बारे में जागरूकता होने से एक क्षेत्र में असंतुलन को ठीक करने में मदद मिल सकती है।
पहले तीन चक्र रीढ़ के आधार पर शुरू होते हैं और प्रकृति में अधिक भौतिक चीजों से संबंधित होते हैं।
 7 चक्र – पूर्ण अर्थ और लाभ
पहला चक्र- मूलाधार स्थिरता और सुरक्षा का चक्र है जो मानव के रूप में हमारी मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल है। यह हमारा मूल चक्र है और इसे पोषित करने की आवश्यकता है। जब यह संतुलित और खुला होता है तो हम सुरक्षा और सुरक्षा की भावना महसूस करते हैं।
दूसरा चक्र- स्वदर्शन चक्र हमारी रचनात्मकता और यौन केंद्र है। यह जघन हड्डी के ठीक ऊपर स्थित है और यह रचनात्मकता का मुख्य स्रोत है। जब यह अजीब से बाहर होता है तो हम रचनात्मक रूप से दंग रह जाते हैं।
तीसरा चक्र- मणिपुर चक्र आपके पेट बटन और स्तन के बीच का क्षेत्र है। यह हमारी व्यक्तिगत शक्ति की भावना से संबंधित है और हम अपने आप को और आत्मसम्मान के बारे में कैसा महसूस करते हैं।
चौथा चक्र- जिसे अनाहत चक्र या हृदय चक्र के रूप में भी जाना जाता है और यह शरीर में ऊपरी और निम्न चक्रों को एकजुट करने के लिए जिम्मेदार है। यह हमारे प्यार और दुनिया और हमारे आसपास के अन्य लोगों के साथ संबंध का स्रोत है। जब हम अपना हृदय चक्र खुला रखते हैं, तो कुछ भी संभव है।
पांचवा चक्र- विशुद्ध चक्र को गले के चक्र के रूप में भी जाना जाता है और यह हमारी गहरी भावनाओं को अनलॉक करने और उच्चतम सत्य बोलने में हमारी मदद करता है। यदि यह चक्र स्थिर है और ऊर्जा प्रवाह सीमित है, तो हम खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम नहीं हैं और इससे अंतर्निहित आक्रोश और असंतोष पैदा होता है।
एक प्राकृतिक लावा स्टोन 7 चक्र हीलिंग ब्रेसलेट को अपने उच्चतम सत्य बोलने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में देखने के लिए यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि ऊर्जा स्वतंत्र रूप से बहती है।
छठा चक्र- अजना को तीसरे नेत्र चक्र के रूप में भी जाना जाता है और हमारी आंत वृत्ति को सुनने के लिए आपके अंतर्ज्ञान और क्षमता से संबंधित है। हम सभी में अपने अंतर्ज्ञान को सुनने की क्षमता होती है और जो हमें बताता है उससे थके होते हैं लेकिन वास्तव में उस क्षमता के साथ संपर्क में रहने के लिए हमें एक खुला चक्र रखने की आवश्यकता होती है।
सातवाँ चक्र- सहस्त्रार चक्र शीर्ष पर या सिर के मुकुट पर स्थित होता है जो हमें आध्यात्मिक संबंध और आत्म-प्रतिष्ठा प्राप्त करने में मदद करता है। प्रेम, प्रकाश और ज्ञान की भावना प्राप्त करने और हमें दिव्य प्राप्ति की ओर ले जाने के लिए इस चक्र को खोलने की आवश्यकता है, यदि आप कभी भूल जाते हैं और एक अनुस्मारक की आवश्यकता होती है तो बस अपनी कलाई को देखें और अपने सातवें चक्र को खोलने पर ध्यान केंद्रित करें
अपने चक्रों से अवगत होना उन्हें संतुलित करने के लिए पहला कदम है और क्योंकि हमारा जीवन असंतुलन की ऐसी स्थिति में है, हमें उन्हें खुला रखने पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रत्येक चक्र के लाभों और अर्थों को समझने में आपकी मदद करने से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके असंतुलन कहां हो सकते हैं। प्राकृतिक लावा स्टोन 7 चक्र हीलिंग ब्रेसलेट की तरह एक अनुस्मारक पहनना आपको मन / शरीर की जागरूकता प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

अपने अवरुद्ध चक्रों को कैसे संतुलित करें

अपने अवरुद्ध चक्रों को कैसे संतुलित करें

अपने अवरुद्ध चक्रों को कैसे संतुलित करें
3 मिनट में अपने अवरुद्ध चक्रों को संतुलित करने का सबसे आसान तरीका
बहुत सारे लोग इस बात से अवगत नहीं हैं कि हमारे शरीर में मौजूद 7 चक्रों (ऊर्जा चैनलों) का मानसिक और शारीरिक रूप से कैसा महसूस होता है। असिंचित के लिए, संस्कृत में चक्र शब्द का अर्थ है ‘पहिया’ और यह कहा जाता है कि ऊर्जा लगातार और इन ऊर्जा बिंदुओं से बहती है।
उनकी उत्पत्ति के बारे में प्रारंभिक हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म से पता लगाया जा सकता है और दोनों ने चक्रों की प्रकृति बदलने की बात की। 7 चक्र जड़ चक्र, त्रिक चक्र, सौर जाल चक्र, हृदय चक्र, गला हैं
जब एक चक्र अवरुद्ध हो जाता है तो क्या होता है
ये 7 मुख्य ऊर्जा केंद्र भावनाओं को विनियमित करने के लिए जाने जाते हैं और आपकी रीढ़ की हड्डी के अंत से शुरू होते हैं और आपके सिर के शीर्ष तक जाते हैं। 7 चक्रों में से प्रत्येक शरीर के एक अलग तत्व के साथ जुड़ा हुआ है, आप यहां इसके बारे में सब पढ़ सकते हैं। जब वे सिंक में होते हैं, तो यह कहा जाता है कि आप खुश और स्वस्थ रहेंगे।
मूल विचार यह है कि ऊर्जा हमारे सिस्टम के माध्यम से स्वतंत्र रूप से प्रवाह करने में सक्षम होनी चाहिए, बिना रुके। जब ऊर्जा केंद्रों में से कोई भी अवरुद्ध हो जाता है, तो प्रभाव पूरे शरीर में महसूस किया जा सकता है। चूंकि सभी 7 चक्र एक सद्भाव में एक साथ काम करते हैं, जब ये ऊर्जा बिंदु असंतुलित हो जाते हैं, तो यह पूरी प्रणाली को संतुलन से बाहर फेंक देता है।
आपको कैसे पता चलेगा कि आपके चक्र अवरुद्ध हैं
यदि आप हाल ही में बाहर और नीचे महसूस कर रहे हैं, और दवाओं और आराम की कोई राशि आपको पटरी पर नहीं आती है, तो शायद आपके चक्र संतुलन से बाहर हैं। गप्पी के संकेतों में से एक यह है कि आपके शरीर में ऊर्जा बिंदु संतुलन के लिए प्रयास कर रहे हैं, जब आप चेतना के किसी विशेष भाग में तनाव महसूस करते हैं।
इसलिए, जब तनाव किसी विशेष अवधि के लिए जारी रहता है, तो यह शारीरिक लक्षण के रूप में प्रकट होता है। याद रखें, असंतुलित चक्रों के कारण पूरे शरीर में अरुचि पैदा हो सकती है शुक्र है, कुछ आसान तरीके हैं जिनके द्वारा आप सामंजस्य और समग्र कल्याण को बहाल करने के लिए इन ऊर्जा बिंदुओं को संतुलित कर सकते हैं।
सही भोजन करना
क्या आप जानते हैं कि आपका प्रत्येक चक्र एक अलग रंग और एक विशिष्ट कंपन का उत्सर्जन करता है?
अपने ऊर्जा पहियों को सद्भाव में लाने के लिए सबसे सरल तरीकों में से एक है अवरुद्ध चक्र के अनुसार अपने आहार को समायोजित करना। अपने शरीर को उस रंग का पर्दाफाश करें जिसमें आप उस कंपन का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे आप संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप हार्ट चक्र को ठीक करना चाहते हैं, तो हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं। हरी चाय का एक कप भी स्वस्थ स्थिति में हृदय चक्र रख सकता है।
आवश्यक तेल
एक कारण है कि आवश्यक तेल अरोमाथेरेपी सहित वैकल्पिक चिकित्सा से जुड़े हैं। चूंकि ये तेल चक्र चिकित्सा का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल चक्रों में जमा तनाव को छोड़ने के लिए किया जा सकता है। आप या तो आवश्यक तेलों को सम्मिलित कर सकते हैं या उन्हें एक उपचार मालिश के लिए उपयुक्त वाहक तेल के साथ जोड़ सकते हैं।
धरती से जुड़ो
जैसा लगता है वैसा ही है। अपने ऊर्जा केंद्रों को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे सरल और सबसे फायदेमंद तरीकों में से एक प्रकृति से जुड़ना है। घास में नंगे पैर चलें, एक दिन धूप में समुद्र तट पर समय बिताएं- मूल रूप से कुछ भी जो आपको प्रकृति के करीब महसूस कराता है।
अरोमाथेरेपी सहित वैकल्पिक चिकित्सा से oil द्वारा आप अपने किसी भी चक्र को सही कर सकते है इसके लिए अगर आप जानना चाहते है की आप का कोनसा चक्र खराब है तो आप हमसे मिले ओरा स्केनर की मदद से हम आप को सही oil के बारे में भी बतायेगे

आपके विवाह में देरी का कारण हो सकती हैं ये सात चीजें

आपके विवाह में देरी का कारण हो सकती हैं ये सात चीजें

आपके विवाह में देरी का कारण हो सकती हैं ये सात चीजें
वास्तु विज्ञान यह कहता है कि वास्तु दोष विवाह में देरी का कारण हो सकता है। इसलिए यदि आप आप शादी योग्य हैं और विवाह में किसी प्रकार की बाधा आ रही है तो यह ख़बर आपके लिए है। दरअसल, वास्तु विज्ञान आपके आस-पास मौजूद चीजों से उत्पन्न उर्जा के प्रभाव को बताता है। यदि आपके घर में वास्तु दोष नहीं है तो घर परिवार और आपके जीवन में प्रगति होगी, जबकि वास्तु दोष होने पर परेशानी आएगी। यह जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होता है। फिर चाहें वह आपका वैवाहिक संबंध हो, या फिर विवाह की इच्छा। ऐसे विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए वास्तु विज्ञान के अनुसार इन सात चीज़ों का ध्यान रखना आवश्यक है।
वास्तु विज्ञान के अनुसार विवाह योग्य कुंवारे लड़कों को दक्षिण और दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं सोना चाहिए। इससे विवाह में बाधा आती है। माना जाता है कि इससे अच्छे रिश्ते नहीं आते हैं।
आपको अपना बिस्तर इस तरह रखना चाहिए ताकि सोते समय पैर उत्तर और सिर दक्षिण दिशा में हो। सोने के इस नियम की अनदेखी से बचना चाहिए।
जिन कमरों में एक से अधिक दरवाजे हों उस कमरे में विवाह योग्य लड़कों को सोना चाहिए। जिन कमरों में हवा और रोशनी का प्रवेश कम हो उन कमरों में नहीं सोना चाहिए।
काले रंग के कपड़े और दूसरी चीजों का इस्तेमाल कम करना चाहिए।
आपके कमरों का रंग डार्क यानी गहरा नहीं होना चाहिए। दीवारों का रंग चमकीला, पीला, गुलाबी होना शुभ होता है।
ऐसी जगह पर न सोएं जहां बीम लटका हुआ दिखाई दे।
कोई और भी आपके साथ कमरे में रहता है तो अपना बिछावन दरवाजे के नजदीक रखें।

WHAT DO THE CHAKRA COLORS MEAN?

WHAT DO THE CHAKRA COLORS MEAN?

WHAT DO THE CHAKRA COLORS MEAN?
Here are the seven chakra colors explained in a clear way. Each color is connected to a specific chakra and it has its own meanings and properties.
Learn more about each chakra color meaning below:
चकोर रंगों का क्या मतलब है?
यहाँ सात चक्र रंगों को स्पष्ट तरीके से समझाया गया है। प्रत्येक रंग एक विशिष्ट चक्र से जुड़ा होता है और इसके अपने अर्थ और गुण होते हैं।
नीचे दिए गए प्रत्येक चक्र के रंग के बारे में और जानें:

RED – Root Chakra – Muladhara
Red color is connected with strength and physical energy, stability, and power. The main function of red chakra is to connect you to your roots, to ground you and offer a firm foundation to all other energy centers in your body.
लाल – मूल चक्र – मूलाधार
लाल रंग शक्ति और शारीरिक ऊर्जा, स्थिरता और शक्ति के साथ जुड़ा हुआ है। लाल चक्र का मुख्य कार्य आपको अपनी जड़ों से जोड़ना है, आपको ग्राउंड करना है और आपके शरीर के अन्य सभी ऊर्जा केंद्रों को एक मजबूत आधार प्रदान करना है।
ORANGE – Sacral Chakra – Svadhisthana
Orange color is the color of sensuality, creativity, passion and sexuality. It is warm and stimulative. In connection with the sacral chakra it helps you develop your creativity and to allow yourself to enjoy in sensual pleasures in life.
नारंगी – त्रिक चक्र – Svadhisthana
नारंगी रंग कामुकता, रचनात्मकता, जुनून और कामुकता का रंग है। यह गर्म और उत्तेजक है। त्रिक चक्र के संबंध में यह आपकी रचनात्मकता को विकसित करने में मदद करता है और अपने आप को जीवन में कामुक सुखों का आनंद लेने की अनुमति देता है।
YELLOW – Solar Plexus Chakra – Manipura
Yellow is the color of pure energy, clarity, joy and optimism. It is related to the power of the sun and fire. In connection to solar plexus chakra it allows you to gain strong willpower and inner strength to pursue your life goals.
येल्लो – सोलर प्लेक्सस चक्र – मणिपुर
पीला शुद्ध ऊर्जा, स्पष्टता, आनंद और आशावाद का रंग है। यह सूर्य और अग्नि की शक्ति से संबंधित है। सौर जाल के चक्र के संबंध में यह आपको अपने जीवन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और आंतरिक शक्ति प्राप्त करने की अनुमति देता है।
GREEN – Heart Chakra – Anahata
Green is the color of nature, equilibrium, life, and growth. It flows from nature and universe through your heart chakra and its energy has healing properties. With power of unconditional love it helps you heal on emotional and physical level.
हरा – हृदय चक्र – अनाहत
हरा रंग प्रकृति, संतुलन, जीवन और विकास का रंग है। यह आपके हृदय चक्र के माध्यम से प्रकृति और ब्रह्मांड से बहती है और इसकी ऊर्जा में उपचार गुण हैं। बिना शर्त प्यार की शक्ति के साथ यह आपको भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर चंगा करने में मदद करता है।
BLUE – Throat Chakra – Vishuddha
Blue is the color of the sky, sea and air. It symbolizes truth, intelligence, and freedom. In relation to the throat chakra it helps you to express your thoughts and emotions verbally in order to bring your inner desires to material manifestation.
नीला- गला चक्र – विशुद्ध
नीला आकाश, समुद्र और हवा का रंग है। यह सत्य, बुद्धिमत्ता और स्वतंत्रता का प्रतीक है। गले के चक्र के संबंध में यह आपके विचारों और भावनाओं को मौखिक रूप से व्यक्त करने में आपकी आंतरिक इच्छाओं को भौतिक अभिव्यक्ति में लाने में मदद करता है।
INDIGO – Third Eye Chakra – Ajna
Indigo color symbolizes inner depth, intuition, wisdom and devotion. The energetical quality which indigo color brings through the third eye chakra will help you develop your intuition, perception, and gain trust into your insights.
इंडिगो – थर्ड आई चक्र – अजना
इंडिगो रंग आंतरिक गहराई, अंतर्ज्ञान, ज्ञान और भक्ति का प्रतीक है। तीसरी आंख के चक्र के माध्यम से जो ऊर्जावान गुणवत्ता लाती है वह आपको अपने अंतर्ज्ञान, धारणा को विकसित करने और अपनी अंतर्दृष्टि में विश्वास हासिल करने में मदद करेगी।
VIOLET, WHITE – Crown Chakra – Sahasrara
Violet color is the color of dreams and imagination and white is the color of purity, innocence and illumination. These colors help you connect your inner-self to its source, and get support from higher spiritual realms.
VIOLET, WHITE – क्राउन चक्र – सहस्रार
बैंगनी रंग सपनों और कल्पना का रंग है और सफेद शुद्धता, मासूमियत और रोशनी का रंग है। ये रंग आपके आंतरिक-स्व को इसके स्रोत से जोड़ने में मदद करते हैं, और उच्च आध्यात्मिक क्षेत्र से समर्थन प्राप्त करते हैं।