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Gemstone

Guru Ratan Pukhraj

गुरू रत्न पुखराज़

विविध नामः

संस्कृत: पुष्पराग, पीतस्फटिक, पीतमणि, जीव रत्न, आदिय आदि

हिन्दी व पंजाबी: पुखराज़

उर्दु व फारसी: पुखराज

अग्रेंजी: टोपाज़

भौतिक गुणः कठोरता 8, आपेक्षित घनत्व 6.53, वर्तनांक 1.61 से 1.62 , तुहरा वर्तन 0.008, अपकिरणन 0.014, पारदर्शक , दुहरा रंग इसमें तीक्ष्ण नही होती। इसको रगड़ने से बिजली उत्पन्न होती है। कांच सी आभा वाला।

गुरू ग्रह का रत्न पुखराज़ जिसे अंग्रेजी में टोपाज़ कहते है।

रासायनिक बनावट की दृष्टि से पुखराज फलुओन सिलिकेट से बना अवयव है। शुद्व पुखराज पीला होता है। इसमें अन्य तत्वो का समावेश होने से इसका रंग पीला हो जाता है। पीला पुखराज सफेद पुखराज की अपेक्षा अधिक शुभ और मूल्यवान माना जाता है। पुखराज सर्वाधिक लोकप्रिय रत्नों में से है। इसे पहनना शुभ और मंगलकारी है। पुखराज के औषधीय प्रयोग पुखराज ग्रह शांति के लिए ही नही है। अपितु स्वास्थ्य लाभ के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। आयुर्वेद में पुखराज की भस्म के अनेक प्रयोग बताए गए है। हडडी की दर्द, खाँसी, पीलिया, बवासीर, आदि रोगो में पुखराज की भस्म का प्रयोग आयुर्वेद के अनुसार करने से शीघ्र लाभ मिलता है। पुखराज के अन्य लाभ पुत्र प्राप्ति के लिए पुखराज रत्न धारण कराया जाता है। धार्मिक क्षेत्र में उच्च सफलता के लिए पुखराज धारण करना आवश्यक होता है। यदि कुण्डली में गुरू शुभ एंव योगकारक ग्रह होकर निर्बल हो, तो ऐसे व्यक्तियों को पुखराज अवश्य पहनना चाहिए। अन्यथा उन्हे जीवन में वाछिंत सफलता नही मिल पाती तथा उनकी प्रतिष्ठा की हानि भी होती है। दूषित गुरू के कारण जातक का चरित्र भी खराब हो जाता है। अतः चरित्र को सुदृढ करने के लिए भी पुखराज रत्न पहनना चाहिए।
 

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