loading

Rudraksh

6 Mukhi Rudraksh

छः मुखी रूद्राक्ष <br/><br/>

छः मुखी रूद्राक्ष के देवता कार्तिकेय हैं। यह कार्तिकेय का स्वरूप होने से शत्रुनाशक सिद्ध हुआ है। इसे धारण करने वाला प्राणी शुभ लक्षणों से युक्त, सदगुणी एंव धैर्यवान होता हैं। धारक पर माता पार्वती की विशेष कृपा दृष्टि रहती है। यह विद्या, ज्ञान बुद्धि का प्रदाता है। छः मुखी रूद्राक्ष धारण करने से मनुष्य की खोई हुई शक्तियां जागृत होती है और स्मरण शक्ति प्रबल होती है। यह धारक को आत्मशक्ति, सकंल्पशक्ति, ज्ञानशक्ति, अध्ययन शक्ति रोगो से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इसको पहनने से मनुष्य वाक्पटु बनता है। इसे धारण करने से अनेक प्रकार के चर्मरोग, हृदय की दुर्बलता तथा नेत्र रोग दूर होता है। यह दरिद्रता का नाश करता है। छः मुखी रूद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति काव्य, व्याकरण, छदं ज्योतिषाचार्य, चारों वेद, रामायण तथा महाभारत आदि ग्रन्थो का विद्वान हो सकता है। इसे धारण करने से आरोग्यता, श्री एवं शक्ति प्राप्त होती है। जिस बालक को जन्मकुण्डली के अनुसार बाल्यकाल में किसी अरिष्ट का खतरा हो, उसे छह मुखी रुद्राक्ष सविधि पहनाने से उसकी रक्षा अवश्य होगी।

छः मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से चर्मरोग, हृदय रोग तथा नेत्ररोग दूर होते हैं। यह हिस्टीरिया,मानसिक रोग, आंखें, प्रजनन अंगों, प्रोस्टेट, मुंह और गले के रोग, कैंसर, किसी भी अंग की शिथिलता, हकलाना और स्त्रियों से संबंधित रोग दूर करने में उत्तम होता है। छह मुखी रुद्राक्ष रक्तचाप, दिमागी परेशानी आदि बीमारियों में लाभकारी है।

छः मुखी रूद्राक्ष को सोमवार के दिन या किसी शुभ महुर्त में विधिपूर्वक प्रातः काल स्नान के बाद ऊँ हीं श्रीं क्लीं सौं ऐं मंत्र का जाप करके काले धागे में गूथंकर यथाविधि धारण करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन एक बार यह मंत्र अवश्य जपें।<br/><br/>

यह रुद्राक्ष हमारे यहाँ विद्वान पंडितों के द्वारा शुभ महुर्त में शुद्ध व सिद्ध किया गया है यदि आप इसे प्राप्त चाहते है