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Rudraksh

Panch Mukhi Rudraksh

पाँच मुखी रूद्राक्ष<br/><br/>

पाँच मुखी रूद्राक्ष रूद्रकालाग्नि नाम से प्रसिद्ध है। यह रुद्राक्ष पंचदेवों-शिव, शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु की शक्तियों से सम्पन्न माना गया है। यह सबसे अधिक शुभ पुष्यदाता माना गया है। कुछ ग्रन्थों में पंचमुखी रुद्राक्ष के स्वामी कालाग्नि रुद्र बताए गए हैं। इसके धारण स्वरूप यश, वैभव, सपंन्नता, सुख शान्ति तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। सामान्यतः पाँच मुख वाला रुद्राक्ष ही उपलब्ध होता है। संसार में ज्यादातर लोगों के पास पाँचमुखी रुद्राक्ष ही हैं। इसकी माला पर पंचाक्षर मंत्र (ऊँ नमः शिवाय) जपने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है। पांच मुखी रूद्राक्ष दीर्घ आयु और अपूर्व स्वास्थ्य प्रदान करता है। पाँच मुखी रूद्राक्ष पहनने से अभक्ष्याभक्ष्य और अगम्यागमन के अपराध से मुक्ति मिलती है। यह रूद्राक्ष मनुष्य को उन्नति के पथ पर चलने की ताकत देता है। पांचमुखी सर्वदेवमयी का रूप माना जाता है। यह सदैव अनिश्चितता महसूस करना मन का बरबस उचाट हो जाना मानसिक दबाव (डिप्रेशन) का शिकार रहना एकाग्रता की कमी में इसे पहनने से लाभ होता है। पांच मुखी रुद्राक्ष रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह कान, अस्थि मज्जा, जिगर, पैरों ,जांघों, और गुर्दे के रोगों को दूर करता है, पेट के विकारों को दूर करने में सहायक होता है। मानसिक शांति के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।

पाँच मुखी रूद्राक्ष को सोमवार के दिन या किसी शुभ महुर्त में विधिपूर्वक प्रातः काल स्नान के बाद ऊँ हां क्रां वां हां अथवा ऊँ हीं नमः मंत्र का जाप करके काले धागे में गूथंकर यथाविधि धारण करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन एक बार यह मंत्र अवश्य जपें।<br/><br/>

यह रुद्राक्ष हमारे यहाँ विद्वान पंडितों के द्वारा शुभ महुर्त में शुद्ध व सिद्ध किया गया है यदि आप इसे प्राप्त चाहते है   ( Contact Us)