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Rudraksh

Rudraksh Mala

रुद्राक्ष की माला

रूद्राक्ष का एक अर्थ है रूद्र यानी शिव की आंख या आंख के आंसू। कहते हैं सती की मृत्यु से शिव को बहुत दुख हुआ और उनके आंसू कई जगह बहे। उनसे रूद्राक्ष के बीज उत्पन्न हुआ। रूद्राक्ष स्वयं भगवान शिव ही हैं । इनमें एक अनोखा स्पंदन होता है, साधक की ऊर्जा को सुरक्षित कर देता है। बाहरी शक्तियां उसे परेशान नहीं कर पाती हैं। ज्योतिष के आधार पर किसी भी ग्रह की शांति के लिए रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। असली रत्न अत्यधिक महंगा होने के कारण हर व्यक्ति उसे धारण नहीं कर सकता है। चंद्र ग्रह के कारण होने वाले रोग या कष्ट हो तो रूद्राक्ष से बिल्कुल दूर हो जाते है। शिव पुराण में कहा गया है कि रूद्राक्ष या इसकी भस्म को धारण करके ‘ऊँ नमः शिवाय’ का जाप कराने वाला मुनष्य शिव रूप हो जाता है। रुद्राक्ष की माल द्वारा मंत्र उच्चारण करने से फल प्राप्ति की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. इसे धारण करने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. रुद्राक्ष की माला अष्टोत्तर शत अर्थात 108 रुद्राक्षों की या 52 रुद्राक्षों की होनी चाहिए अथवा सत्ताईस दाने की तो अवश्य हो इस संख्या में इन रुद्राक्ष मनकों को पहना विशेष फलदायी माना गया है. शिव भगवान का पूजन एवं मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला से करना बहुत प्रभावी माना गया है तथा साथ ही साथ  अलग-अलग रुद्राक्ष के दानों की माला से जाप या पूजन करने से विभिन्न इच्छाओं की पूर्ति होती है.

माला में रुद्राक्ष की संख्या

माला में रुद्राक्ष के मनकों की संख्या उसके महत्व का परिचय देती है. भिन्न-भिन्न संख्या मे पहनी जाने वाली रुद्राक्ष की माला निम्न प्रकार से फल प्रदान करने में सहायक होती है जो इस प्रकार है-

 

रुद्राक्ष के सौ मनकों की माला धारण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

रुद्राक्ष के एक सौ आठ मनकों को धारण करने से समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. इस माला को धारण करने वाला अपनी पीढ़ियों का उद्घार करता है

रुद्राक्ष के एक सौ चालीस मनकों की माला धारण करने से साहस, पराक्रम और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.

रुद्राक्ष के बत्तीस दानों की माला धारण करने से धन, संपत्ति एवं आय में वृद्धि होती है.

रुद्राक्ष के 26 मनकों की माला को सर पर धारण करना चाहिए

रुद्राक्ष के 50 दानों की माला कंठ में धारण करना शुभ होता है.

रुद्राक्ष के पंद्रह मनकों की माला मंत्र जप तंत्र सिद्धि जैसे कार्यों के लिए उपयोगी होती है.

रुद्राक्ष के सोलह मनकों की माला को हाथों में धारण करना चाहिए.

रुद्राक्ष के बारह दानों को मणिबंध में धारण करना शुभदायक होता है.

रुद्राक्ष के 108, 50 और 27 दानों की माला धारण करने या जाप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

रुद्राक्ष की माला महत्व

रुद्राक्ष की माला को धारण करने पर इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है कि कितने रुद्राक्ष की माला धारण कि जाए. क्योंकि रुद्राक्ष माला में रुद्राक्षों की संख्या उसके प्रभाव को परिलक्षित करती है. रुद्राक्ष धारण करने से पापों का शमन होता है. आंवले के सामान वाले रुद्राक्ष को उत्तम माना गया है. सफेद रंग का रुद्राक्ष ब्राह्मण को, रक्त के रंग का रुद्राक्ष क्षत्रिय को, पीत वर्ण का वैश्य को और कृष्ण रंग का रुद्राक्ष शुद्र को धारण करना चाहिए.

रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को लहसुन, प्याज तथा नशीले भोज्य पदार्थों तथा मांसाहार का त्याग करना चाहिए.  सक्रांति, अमावस, पूर्णिमा और शिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है.

सभी वर्ण के मनुष्य रुद्राक्ष को पहन सकते हैं. रुद्राक्ष का उपयोग करने से व्यक्ति भगवान शिव के आशीर्वाद को पाता है. व्यक्ति को दिव्य-ज्ञान की अनुभूति होती है. व्यक्ति को अपने गले में बत्तीस रुद्राक्ष, मस्तक पर चालीस रुद्राक्ष, दोनों कानों में 6,6 रुद्राक्ष, दोनों हाथों में बारह-बारह, दोनों भुजाओं में सोलह-सोलह, शिखा में एक और वक्ष पर एक सौ आठ रुद्राक्षों को धारण करता है, वह साक्षात भगवान शिव को पाता है.

 

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