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Rudraksh

Ek Mukhi Rudraksh Kaju

एक मुखी रूद्राक्ष
 

एकमुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिव का स्वरूप होने से परब्रह्म का प्रतीक माना गया है। एक मुखी रूद्राक्ष शिव स्वरूप परातत्व का प्रकाशक है। इसका प्राय अर्द्धचन्द्राकार रूप ही दिखाई देता है। ऐसा रुद्राक्ष जिसमें एक ही आँख अथवा बिंदी हो एकदम गोल एकमुखीरुद्राक्ष लगभग अप्राप्य ही है। यह किस्मत वालों को ही मिलता है। इसे धारण करने से प्राणी चिन्तामुक्त होकर निर्भय रहता हैं। ब्रहाहत्या का पाप दूर होता हैं। इसके पूजन से लक्ष्मी का वास होता है। समस्त कामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में कभी किसी वस्तु का अभाव नहीं होता है। भोग के साथ मोक्ष प्रदान करने में समर्थ एकमुखी रुद्राक्ष भगवान शंकर की परम कृपा से ही मिलता है। एक मुखी रूद्राक्ष सर्वोतम सर्व मनोंकामना सिद्धि फलदायक और मोक्षदाता है। एक मुखी रूद्राक्ष जिस व्यक्ति के गले में होता है। उस व्यक्ति के शत्रु खुद ही परास्त हो जाते हैं।

एक मुखी रुद्राक्ष का उपयोग करने से नेत्रों की ज्योती तीव्र होती है। सिरदर्द, हृदय रोग, नजर दोष, उदर संबंधी रोग जैसी अनेक बिमारीयों से छुटकारा मिलता है। स्नायु रोग, अतिसार से संबंधित रोगों को दूर करने में यह रुद्राक्ष लाभदायक होता है।

        एक मुखी रूद्राक्ष को सोमवार के दिन या किसी शुभ महुर्त में विधिपूर्वक प्रातः काल स्नान के बाद ऊँ एं हं औं एं ऊँ मंत्र का 108 बार जाप करके काले धागे में गूथंकर यथाविधि धारण करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन एक बार यह मंत्र अवश्य जपें। एक मुखी रूद्राक्ष गल्ले में रखने से गल्ला कभी धन से खाली नही होता है।
 

यह रुद्राक्ष हमारे यहाँ विद्वान पंडितों के द्वारा शुभ महुर्त में शुद्ध व सिद्ध किया गया है यदि आप इसे प्राप्त चाहते है