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Rudraksh

14 Mukhi Rudraksh

चौदह मुखी रूद्राक्ष <br/><br/>

चौदह  मुखी रूद्राक्ष रूद्र के नेत्र से प्रकट हुआ हैं। इसे हनुमान जी का स्वरूप मानते है। बलशाली हनुमान का प्रतीक होने से यह रूद्राक्ष भूत-पिशाच तथा अन्य सकटों से रक्षा करके बल एंव साहस प्रदान करता है।चौदह  मुखी रूद्राक्ष का महत्व इसलिए अधिक है। क्योंकि स्वंय भगवान शिव चौदह मुखी रूद्राक्ष धारण किये हुए है। इसीलिए चौदह मुखी ही एकमात्र ऐसा रूद्राक्ष है। जिसका एक दाना धारण करने से मनुष्य खुद ही साक्षात शिव स्वरूप हो जाता है। इसको धारण करने से मनुष्य जन्मो के सस्ंकार से अलग होकर पूर्णता की प्राप्ति करता है। चौदहमुखी रुद्राक्ष मृत्युंजय का स्वरूप होने से सर्वरोगनिवारक सिद्ध हुआ है। इसको धारण करने से असाध्य रोग भी शान्त हो जाता है। जन्म जन्मान्तर के पापों का शमन होता है। चौदहमुखी रूद्राक्ष को धारण करने से विभिन्न प्रकार की समस्याओं से मुक्ति प्राप्त कर आनन्दमय जीवन गुजारा जा सकता है। इस रूद्राक्ष को गले या भुजा में पहनने से धार्मिक कार्यो में मन लगता है जिससे मन में आत्मविश्वास से भरा रहता है। इसे पहनने से तमाम प्रकार के कष्टों एंव दुःखों से निजात मिलती है। मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक सभी प्रकार की पीड़ाओं को दूर करने में मददगार साबित होता है। उत्तम स्वास्थ्य एंव निरोगी काया के लिए चौदहमुखी रूद्राक्ष सर्वथा कल्याणकारी प्रतीत होता है। जिस परिवार में अकालमृत्यु होने की परम्परा चली आ रही है, उन लोगों को गले में चौदहमुखी रूद्राक्ष का नियमित पूजन व अर्चना करके पहनना चाहिए। जिन जातकों को आर्थिक समस्या बनी रहती है, उन लोगों के लिए यह रूद्राक्ष धारण करना विशेष लाभप्रद रहता है। जो व्यक्ति अधिक पढ़ते-लिखते है, उन्हे यह रूद्राक्ष धारण करना चाहिए जिससे उनकी मानसिक उर्जा में वृद्धि होती है।

चौदहमुखी रूद्राक्ष को सोमवार के दिन या किसी शुभ महुर्त में विधिपूर्वक प्रातः काल स्नान के बाद ऊँ नमः मंत्र का जाप करके काले धागे में गूथंकर यथाविधि धारण करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन एक बार यह मंत्र अवश्य जपें।<br/><br/>

यह रुद्राक्ष हमारे यहाँ विद्वान पंडितों के द्वारा शुभ महुर्त में शुद्ध व सिद्ध किया गया है यदि आप इसे प्राप्त चाहते है