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Rudraksh

12 Mukhi Rudraksh

बारह मुखी रूद्राक्ष
 

बारह मुखी रूद्राक्ष आदित्य स्वरूप तेजस्वी महाविष्णु का कारण हैं। इसे धारण करने वाला प्राणी राजा बनने के योग्य होता है। यह व्यक्ति को प्रभावशाली बना देता है। इसे धारण करने से सात जन्मों से चला आ रहा दुर्भाग्य भी दूर हो जाता है और धारक का निश्चय ही भाग्योदय होता है। चोर, अग्नि, दारिद्रय, एंव व्याधियों से मुक्ति मिलती है। धन पुत्रादि की प्राप्ति होती हैं। बारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है और शासन करने का अवसर भी प्राप्त होता है। इसको धारण करने से हमेशा चेहरे पर खुशी समाज में मान सम्मान तथा वाणी में चातुर्यता उत्पन्न होती है और व्यक्ति कभी रोग, चिन्ता, भय, भ्रम से परेशान नही होता। यह शादि-विवाह सम्बन्धों की विवशताओं को दूर करता है।

        बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से हृदय रोग, फेफड़ों के रोग, त्वचा रोग तथा आंत संबंधी रोग दूर होते हैं। सभी प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक परेशानियों का नाश होता है। बारहमुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाला निरोगी होकर स्वास्थ्य लाभ पाता है।

        बारह मुखी रूद्राक्ष को सोमवार के दिन या किसी शुभ महुर्त में विधिपूर्वक प्रातः काल स्नान के बाद ऊँ हीं क्षौं घृणि श्री मंत्र का जाप करके काले धागे में गूथंकर यथाविधि धारण करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन एक बार यह मंत्र अवश्य जपें।
 

यह रुद्राक्ष हमारे यहाँ विद्वान पंडितों के द्वारा शुभ महुर्त में शुद्ध व सिद्ध किया गया है यदि आप इसे प्राप्त चाहते है