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Rudraksh

11 Mukhi Rudraksh

11 ग्यारह मुखी रूद्राक्ष
 

ग्यारह मुखी रूद्राक्ष साक्षात पारब्रहम शिव का रूद्र स्वरूप माना गया है। रुद्र स्वरूप होने से तेजस्विता प्रदान करता है। इसे धारण करने वाला कभी कहीं पराजित नहीं होता है। ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का उपयोग एवं पूजन से एकादशी व्रत के समान फल प्राप्त होता है। इस रुद्राक्ष को गले में धारण करने से हजार अश्वमेघ यज्ञ, वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य मिलता है। यह विजय दिलाने वाला, ज्ञान एवं भक्ति प्रदान करने वाला होता है। इसे धारण करने से हजारों गोदान का पुण्य फल मिलता है। जो चन्द्र ग्रहण में किए गए दान तथा वाजपेय यज्ञ से कई गुणा अधिक होता है। इससे यश वैभव तथा चारो और अपार प्रसिद्धि मिलती है। यह स्त्रियों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसको धारण करने से पति की सुरक्षा उसकी दीर्घ आयु एंव उन्नति तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धा तथा विश्वास पूर्वक इसे धारण करने से बन्धया स्त्री भी पुत्र प्राप्ति कर सकती है। ग्यारह मुखी रुद्राक्ष की पूजा अमोघ फलदायी होती है। इसे धारण करने से सभी संकट व कष्ट दूर हो जाते हैं। यह रुद्राक्ष धारक को उचित निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। बल, बुद्धि प्रदान करता है, ध्यान-साधना करने में मददगार साबित होता है। इसे धारण करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। ग्यारह मुखी रुद्राक्ष का उपयोग अस्थमा एवं सांस से संबंधित बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। मस्तिष्क सम्बन्धी विकारों को दूर करता है। संक्रामक रोगों के नाश के लिए तथा शरीर को बलिष्ट व निरोगी बनाने में ग्यारह मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होता है।

ग्यारह मुखी रूद्राक्ष को सोमवार के दिन या किसी शुभ महुर्त में विधिपूर्वक प्रातः काल स्नान के बाद ऊँ रूं मूं औं मंत्र का जाप करके काले धागे में गूथंकर यथाविधि धारण करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन एक बार यह मंत्र अवश्य जपें।
 

यह रुद्राक्ष हमारे यहाँ विद्वान पंडितों के द्वारा शुभ महुर्त में शुद्ध व सिद्ध किया गया है यदि आप इसे प्राप्त चाहते है