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Panchak

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Panchak Starts On

March 05, 2019 (Tuesday) at 01:45

Panchak Ends On

March 10, 2019 (Sunday) at 01:19

 

धनिष्ठा का उतरार्ध, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उतरा भाद्रपद व रेवती इन पांच नक्षत्रों ( सैद्धान्तिक रुप से साढेचार) को पंचक कहते है. पंचक का अर्थ ही पांच का समूह है. सरल शब्दों में कहें तो कुम्भ व मीन में जब चन्द्रमा रहते है. तब तक की अवधि को पंचक कहते है. इन्ही को कहीं-कहीं पर धनिष्ठा पंचक (Dhanishtha Panchak) भी कहा जाता है
एक अन्य मत से पंचकों में धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति को अंग दोष होने का विचार किया जाता है. धनिष्ठा नक्षत्र के प्रथम आधे भाग को भी कुछ स्थानों पर शुभ नहीं समझा जाता है. पंचक में पांच कार्य करने सर्वथा वर्जित माने जाते है. इसमें 
1. दक्षिण दिशा की यात्रा : पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।
2. ईंधन एकत्र करना : पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है। (आज के युग में पेट्रोल भरवाना या रसोई गैस ले कर रखना इसी में आएगा  )
3. शव का अन्तिम संस्कार : पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए। 
4. घर की छत डालना : पंचक के दौरान घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
5. चारपाई बनवाना: पंचक नक्षत्रो में चारपाई बनवाना अशुभ मन जाता है क्योकि चारपाई आराम के लिए होती है व पंचक में चारपाई बनवाने से घर में बीमारी आती है. ( आज के युग में बेड बनवाना ) 
शुभ नहीं माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन नक्षत्र समय में इनमें से कोई भी कार्य करने पर, उक्त कार्य को पांच बार दोहराना पड सकता है एक अन्य प्रसिद्ध ग्रन्थ "मुहूर्तगणपति" के अनुसार उक्त कामों के अतिरिक्त स्तम्भ बनवाना या स्तम्भ खडा करना भी इस अवधि में वर्जित होता है.
अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है। वहीं सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक कहलाता है। जो पंचक मंगलवार को शुरू हो उसे अग्नि पंचक कहते हैं इस दौरान आग लगने का भय ज्याद रहता है। अग्नि पंचक औजारों की खरीदारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए। पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहे हैं तो उन्हें ज्यादा अशुभ नहीं कहा जाता। पंचक के मुख्य निषेध कर्मों को छोड़कर कोई भी कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा मृत्यु पंचक और चोर पंचक होता है। मृत्यु पंचक शनिवार और चोर पंचक शुक्रवार को होता है। दोनो काफी घातक और अशुभ पंचक माने जाते हैं।
लेकिन पंचक सदैव खराब होते हैं, ऐसा सोचना गलत है। इसी प्रकार कुछ काम पंचक में करने शुभ फलदायी भी होते है . जैसे कि क़र्ज़ उतरना , दान देना , पूजा पाठ करना, बैंक में पैसा जमा करवाना. पंचक को बहुत अशुभ माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद शादी-विवाह जैसे कार्य करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होती। पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद व रेवती, रविवार को होने से 28 योगों में से 3 शुभ योग चर, स्थिर व प्रवर्ध, बनाते हैं। इस समय शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त करने का विचार किया जा सकता है। घनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल संज्ञक माने जाते हैं, इसमें आप वाहन से जुड़ी खरीददारी या यात्रा जैसे कार्य कर सकते हैं। उत्तरभाद्रपद नक्षत्र को स्थिर संज्ञक नक्षत्र कहा गया है, इसमें आप अचल संपत्ति से जुड़े कार्य कर सकते हैं। आप नया घर खरीद सकते हैं, भूमि से जुड़े कार्य, गृह प्रवेश और खेत में बीज रोपण करने जैसे कार्य कर सकते हैं। रेवती नक्षत्र को मैत्री संज्ञक माना गया है, इस दौरान आप नए कपड़े या गहने खरीदने के साथ-साथ व्यापारिक समझौता भी कर सकते हैं। रेवती नक्षत्र शांत और नरम माना गया है, इसलिए संगीत, नृत्य, कलात्मक कार्यों, फैशन शो, इत्यादि का कार्य लाभदायी रहता है।
 
AstrologerKanchan Pardeep Kukreja
 
Divya Jyoti Astro And Vaastu