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धनतेरस पूजन की सबसे सरल और प्रामाणिक विधि

धनतेरस पूजन की सबसे सरल और प्रामाणिक विधि

 

05 नवम्बर , 2018 को धनतेरस का पवित्र पर्व है। इस दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि पूजे जाते हैं। आइए जानें सरलतम पूजन विधि और प्रामाणिक पौराणिक मंत्र ... 

 

 *  सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवान जी का चित्र स्थापित करें। 

*  शुद्ध चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें। 

* श्रीगणेश का ध्यान व पूजन करें। 

* हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें। 

* इस मंत्र से ध्यान करें : 

 

* मंत्र :  देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान

दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः 

पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो

धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः 

ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः 

ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि...  

* पुष्प अर्पित कर दें और जल का आचमन करें। 

 

* 3 बार जल के छींटे दें और यह बोलें ... मंत्र : पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि।  

* भगवान धन्वंतरि के चित्र का जल के छींटों और मंत्र से स्नान कराएं।  

 

* मंत्र : ॐ धनवन्तरयै नमः 

  मंत्र :स्नानार्थे जलं समर्पयामि 

*  पंचामृत स्नान कराएं 

 

*  मंत्र : ॐ धनवन्तरायै नमः 

मंत्र : पंचामृत स्नानार्थे पंचामृत समर्पयामि ||

* फिर जल से स्नान कराएं। 

 

* मंत्र : पंचामृत स्नानान्ते शुद्धोधक स्नानं समर्पयामि ||

* इत्र छिड़कें। 

 

मंत्र : सुवासितं इत्रं समर्पयामि 

* वस्त्र या मौली अर्पित करें 

 

मंत्र : वस्त्रं समर्पयामि 

*  रोली या लाल चंदन से तिलक करें।  

 

मंत्र : गन्धं समर्पयामि (इत्र चढ़ाएं) 

मंत्र : अक्षतान् समर्पयामि (चावल चढ़ाएं) 

मंत्र : पुष्पं समर्पयामि (फूल चढ़ाएं) 

मंत्र : धूपम आघ्रापयामि (अगरबत्ती जलाएं)

मंत्र : दीपकं दर्शयामि ( जलते दीपक की पूजा करें फिर उसी से आरती घुमाएं) 

मंत्र : नैवेद्यं निवेद्यामि (प्रसाद चढ़ाएं, प्रसाद के आसपास पानी घुमाएं)  

मंत्र : आचमनीयं जलं समर्पयामि... (अपने आसन के आसपास पानी छोड़ें) 

मंत्र : ऋतुफलं समर्पयामि (फल चढ़ाएं, फल के चारों तरफ पानी घुमाएं) 

मंत्र : ताम्बूलं समर्पयामि (पान चढ़ाएं) 

मंत्र : दक्षिणा समर्पयामि (चांदी-सोने के सिक्के अगर खरीदें हैं तो उन्हें अर्पित करें या फिर घर में रखें रुपए-पैसे चढ़ाएं।  

मंत्र : कर्पूर नीराजनं दर्शयामि ( कर्पूर जलाकर आरती करें) 

* धन्वंतरि जी से यह प्रार्थना करें : हे आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि देव समस्त जगत को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायुष्य प्रदान करें। हमें सपरिवार आरोग्य का वरदान प्रदान करें। 

* धन तेरस की शाम को प्रदोषकाल में अपने घर के मुख्य दरवाजे पर अन्न की ढेरी पर दोनों तरफ दीपक जलाएं और उस समय यमराजजी का ध्यान करें। यह मंत्र बोलें। 

 

मंत्र : मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह |

त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यजः प्रीयता मिति ||

कुबेर मं‍त्र : ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधि पतये धनधान्य समृद्धि में देहि दापय दापय स्वाहा।। 

अंत में मां लक्ष्मी, कुबेर, गणेश, मिट्टी के हाथी और धन्वंतरि जी सबका एक साथ पूजन करें। आरती करें। आपकी धनतेरस पूजन संपन्न हुई। 

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धनतेरस के पर्व को दीपावली का आरंभ माना जाता है। इस दिन को धन एवं आरोग्य से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि इस दिन भगवान धनवंतरि और कुबेर का पूजन अर्चन किया जाता है। ताकि हर घर में समृद्धि और आरोग्य बना रहे। धनतेरस पर पढ़ें यह विशेष 6 बातें -  

1 धनतेरस, धनवंतरि त्रयोदशी या धन त्रयोदशी दीपावली से पूर्व मनाया जाना महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन आरोग्य के देवता धनवंतरी, मृत्यु के अधिपति यम, वास्तविक धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी तथा वैभव के स्वामी कुबेर की पूजा की जाती है।

2  इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे मान्यता है कि लक्ष्मी के आह्वान के पहले आरोग्य की प्राप्ति और यम को प्रसन्न करने के लिए कर्मों का शुद्धिकरण अत्यंत आवश्यक है। कुबेर भी आसुरी प्रवृत्तियों का हरण करने वाले देव हैं। 

3  धनवंतरि और मां लक्ष्मी का अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था। दोनों ही कलश लेकर अवतरित हुए थे। इसके साथ ही मां लक्ष्मी का वाहन ऐरावत हाथी भी समुद्र मंथन द्वारा अवतरित हुआ था।

4  श्री सूक्त में लक्ष्मी के स्वरूपों का विवरण कुछ इस प्रकार मिलता है। 'धनमग्नि, धनम वायु, धनम सूर्यो धनम वसु:'अर्थात् प्रकृति ही लक्ष्मी है और प्रकृति की रक्षा करके मनुष्य स्वयं के लिए ही नहीं, अपितु नि:स्वार्थ होकर पूरे समाज के लिए लक्ष्मी का सृजन कर सकता है। 

5  श्री सूक्त में आगे यह भी लिखा गया है- 'न क्रोधो न मात्सर्यम न लोभो ना अशुभा मति' तात्पर्य यह कि जहां क्रोध और किसी के प्रति द्वेष की भावना होगी, वहां मन की शुभता में कमी आएगी, जिससे वास्तविक लक्ष्मी की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न होगी। यानी किसी भी प्रकार की मानसिक विकृतियां लक्ष्मी की प्राप्ति में बाधक हैं।

6  आचार्य धनवंतरि के बताए गए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी उपाय अपनाना ही धनतेरस का प्रयोजन है। श्री सूक्त में वर्णन है कि, लक्ष्मी जी भय और शोक से मुक्ति दिलाती हैं तथा धन-धान्य और अन्य सुविधाओं से युक्त करके मनुष्य को निरोगी काया और लंबी आयु देती हैं। अत: धनतेरस पर लक्ष्मी जी का पूजन अवश्य करें। 

 

Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja

Divya Jyoti Astro and Vaastu,

Abohar & Ludhiana