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विजयादशमी 19 अक्टूबर को

विजयादशमी 19 अक्टूबर को
 
विजयादशमी यानी दशहरा 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। लेकिन दशमी तिथि की शुरूआत 18 अक्टूबर को 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। लिहाजा इस शुभ अवधि में पूजा-पाठ काफी फलदायी होती है।  भारत वर्ष में मनाये जाने वाले त्यौहार किसी न किसी रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं लेकिन असल में जिस त्यौहार को इस संदेश के लिये जाना जाता है वह है दशहरा। दीवाली से ठीक बीस दिन पहले। दशहरा का मतलब ही होता है दसवीं तिथि। हिंदू ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक सालभर में 3 सबसे शुभ घड़ियां होती हैं। पहली चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, दूसरी कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा और तीसरा है दशहरा। ऐसी मान्यता है कि जिस भी काम की शुरुआत इस दिन की जाती है उसमें जरुर कामयाबी मिलती है। इसलिए इस दिन किसी भी काम का आरंभ उसमें सफलता की गारंटी माना जाता है। पंचाग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी अथवा दशहरे के रुप में देशभर में मनाया जाता है। दशहरा हिंदूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार भगवान श्री राम की कहानी तो कहता ही है जिन्होंनें लंका में 9 दिनों तक लगातार चले युद्ध के पश्चात अंहकारी रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया। वहीं इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिये भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है और मां दूर्गा की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी मां दूर्गा की पूजा कर शक्ति का आह्वान किया था, भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिये रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया। चूंकि श्री राम को राजीवनयन यानि कमल से नेत्रों वाला कहा जाता था इसलिये उन्होंनें अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयीहोने का वरदान दिया। माना जाता है इसके पश्चात दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया। भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में देशभर में मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने के अलग अंदाज भी विकसित हुए हैं। कुल्लू का दशहरा देश भर में काफी प्रसिद्ध है तो पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
इस दिन क्या करना होता है अत्यंत शुभ?
दशहरे के दिन नीलकंठ भगवान के दर्शन करना अति शुभ माना जाता है।
वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, सोना, आभूषण नए वस्त्र इत्यादि खरीदना शुभ होता है। 
सुबह में शमी के पेड़ की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
दशहरा के दिन नए कार्य की शुरुआत करना बेहद अच्छा माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन किसी भी काम की शुरुआत करने से उसमें सफलता जरूर मिलती है।
रावण दहन के बाद की थोड़ी राख को घर में रखना काफी शुभ माना जाता है।
 
Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja
Divya Jyoti Astro and Vaastu,
Abohar & Ludhiana