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स्त्रियों का सब से प्रिय व्रत करवा चौथ

स्त्रियों का सब से प्रिय व्रत करवा चौथ

 

 

भारत में हर साल कई त्योहार मनाए जाते हैं. जिनका अपना अलग महत्व होता है. वैसे ही हिन्दू धर्म में शादीशुदा महिलाओं के लिए करवा चौथ व्रत का सब से अधिक महत्व होता है. नवरात्रि और दशहरा के बाद करवा चौथ आता है. जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. करवाचौथ का व्रत हर सुहागिन की जिंदगी संवार सकता है, लेकिन इसके लिए इस व्रत से जुड़े नियम और सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. करवाचौथ के व्रत और पूजन की सही विधि से इस व्रत का कई गुना फल मिलेगा. 

भारत में हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को जो उपवास किया जाता है उसका सुहागिन स्त्रियों के लिये बहुत अधिक महत्व होता है। दरअसल इस दिन को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन यदि सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखद होने लगता है। हालांकि पूरे भारतवर्ष में हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग बड़ी धूम-धाम से इस त्यौहार को मनाते हैं लेकिन उत्तर भारत खासकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि में तो इस दिन अलग ही नजारा होता है। करवाचौथ व्रत के दिन एक और जहां दिन में कथाओं का दौर चलता है तो दूसरी और दिन ढलते ही विवाहिताओं की नज़रें चांद के देखने के लिये बेताब हो जाती हैं। चांद निकलने पर घरों की छतों का नजारा भी देखने लायक होता है। दरअसल सारा दिन पति की लंबी उम्र के लिये उपवास रखने के बाद आसमान के चमकते चांद का दिदार कर अपने चांद के हाथों से निवाला खाकर अपना उपवास खोलती हैं। करवाचौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले ही 4 बजे के बाद शुरु हो जाता है और रात को चंद्रदर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है। इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है और करवाचौथ व्रत की कथा सुनी जाती है। इसी लिए इस व्रत को संकटी चतुर्थी के नाम से भी जाना है. सामान्यत: विवाहोपरांत 12 या 16 साल तक लगातार इस उपवास को किया जाता है लेकिन इच्छानुसार जीवनभर भी विवाहिताएं इस व्रत को रख सकती हैं। माना जाता है कि अपने पति की लंबी उम्र के लिये इससे श्रेष्ठ कोई उपवास नहीं है। करवा चौथ महिलाएँ अपने पति की सुरक्षा और लम्बी उम्र के लिए बिना पानी और बिना भोजन के पूरे दिन कठिन व्रत रखती हैं. करवा चौथ का व्रत कुछ अविवाहित लड़कियों द्वारा भी रखा जाता है अपने मंगेतर की लंबी उम्र के लिए रखती हैं.करवा चौथ के मौके पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए दिनभर व्रत रखती हैं. फिर छलनी से चंद्रमा और पति को देखते हुए पूजा करती हैं. फिर अंत में चांद का दीदार करने के बाद महिलाएं पति के हाथों पानी पीकर अपना व्रत तोड़ती हैं. ये माना जाता है कि अगर छलनी में चंद्रमा देखते हुए पति की शक्ल देखना शुभ माना जाता है.

करवा चौथ पूजा मुहूर्त 

करवा चौथ का व्रत सुबह सूर्य उदय से पहले शुरू किया जाता है परन्तु इसकी कथा,पूजा व चंद्र दर्शन संध्या सूर्य अस्त के बाद ही किये जाते है इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की चौथ 27 अक्टूबर 2018 को शाम 18:40 से शुरू कर 28 अक्टूबर 2018 को शाम 16:54 मिंट तक रहेगी क्योकि चतुर्थी का चंद्र दर्शन 27 को होगा इस लिए करवा चौथ का व्रत 27 अक्टूबर को रखा जायेगा.

करवा चौथ पूजा मुहूर्त 17:46 से 19:04

चन्द्रोदय 20:04 (अनुमानित क्षेत्र अनुसार )

 

करवा चौथ पूजन विधि

पंजाब में करवा चौथ का त्यौहार सरगी के साथ आरम्भ होता है। जो महिलाएँ इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उनके लिए सरगी बनाती हैं। शाम को सभी महिलाएँ श्रृंगार करके एकत्रित होती हैं और फेरी की रस्म करती हैं। इस रस्म में महिलाएँ एक घेरा बनाकर बैठती हैं और पूजा की थाली एक दूसरे को देकर पूरे घेरे में घुमाती हैं। इस रस्म के दौरान एक बुज़ुर्ग महिला करवा चौथ की कथा गाती हैं। भारत के अन्य प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गौर माता की पूजा की जाती है। गौर माता की पूजा के लिए प्रतिमा गाय के गोबर से बनाई जाती है।

  1. प्रात: काल अमृत वेला ( 4 बजे) में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें।व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें।
  2. व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें.
  3. प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- 'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'
  4. घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर चावलों को पीसे। फिर इस घोल से करवा चित्रित करें। इस रीती को करवा धरना कहा जाता है।( अपने क्षेत्र या समुदाय के नियम अनुसार)
  5. माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें।
  6. भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें।
  7. सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत कर व्रत की कथा का श्रवण(सुने) करें।
  8. सायं काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति द्वारा अन्न एवं जल ग्रहण करें।
  9. पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें।
  10. व्रत कथा सुनने के बाद सास को कुछ तोहफा अवश्य दें व् पूर्ण रूप से झुक कर उनके चरण स्पर्श करें।
  11. सब से मह्त्वपूर्ण बात यथा संभव मौन रहे आपने ध्यान इष्ट भक्ति में लगावे व किसी की निंदा चुगली न करे।

 

Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja

Divya Jyoti Astro and Vaastu,

Abohar & Ludhiana