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तुलसी चढ़ाने से नाराज होते हैं गणेश

तुलसी चढ़ाने से नाराज होते हैं गणेश

 

 

 

पुराणों के अनुसार भगवान राम, कृष्णे और विष्णुा को तुलसी का भोग लगाने से वह जल्द प्रसन्ना होते हैं, साथ ही उनके प्रसाद में भी तुलसी को डाला जाता हैं, लेकिन गणेशजी के भोग में तुलसी का प्रयोग क्यो वर्जित बताया गया है. कहा जाता हैं गणेशजी को तुलसी का भोग लगाने से वह क्रोधित हो जाते हैं.

 

पौराणिक कथा के अनुसार पुराणों में बताया गया है कि जब गणेशजी गंगा नदी के किनारे तपस्याम मे लिन थे तो कालावधि में धर्मात्मज की कन्या तुलसी विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर गई थी.

 

तुलसी जी सभी तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए अंत में गंगा के तट पर पहुंच गई, जहा गंगा तट पर युवा गणेश जी तपस्या में लीन थे.

शास्त्रों मे बताया गया है की तपस्या में लीन गणेश जी रत्न जटित सिंहासन पर विराजमान थे समस्त अंग पर चंदन, गले में पारिजात पुष्पों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के हार, उनकी कमर में अत्यन्त कोमल रेशम का पीताम्बर लिपटा हुआ था, जो उनकी सुंदरता मे चार चाँद लगा रहे थे.

 

तुलसी जी गणेश के सुंदर स्वनरूप को देखकर उन पर मोहित हो गईं. तुलसी जी के मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा जाग्रत हो गई. विवाह की इच्छा से तुलसी ने उनका ध्यान भंग कर दिया.

 

श्री गणेश ने तुलसी द्वारा तप को भंग करने को अशुभ बताते हुए तुलसी की मंशा जानकर स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुऐ विवाह प्रस्ताव को नकार दिया.

 

विवाह प्रस्ताव ठुकराने पर तुलसी जी ने गणेशजी को शाप देते हुऐ कहा की आपके एकन नहीं बल्कि दो-दो विवाह होंगे. इतना सुनकर श्री गणेश ने भी तुलसी को शाप देते हुऐ कहा की तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा, राक्षस की पत्नी होने का शाप सुनते ही तुलसी ने गणेशजी से माफी मांगी.

 

गणेशजी ने तुलसी की याचना सुनते हुऐ कहा कि शंखचूर्ण राक्षस से तुम्हारा विवाह  होगा, किंतु भगवान विष्णु एवं श्रीकृष्ण को प्रिय होने के साथ कलयुग में जगत के लिए जीवन एवं मोक्ष देने वाली होगी. लेकिन मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाएगा. तभी से श्री गणेश की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित है.

 

Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja

Divya Jyoti Astro and Vaastu,

Abohar & Ludhiana