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नाग पंचमी 2018 : पूजा का शुभ मुहूर्त और सर्प पूजन मंत्र

नाग पंचमी 2018 : पूजा का शुभ मुहूर्त और सर्प पूजन मंत्र

 

 

 

हिन्दू धर्म में बहुत से बड़े छोटे जीवों का पूजन किया जाता है जिनमे से एक है नाग यानी सर्प। नाग को हिन्दू धर्म में देवता का स्थान प्राप्त है और उन्ही के पूजन के लिए नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। नाग पंचमी हिन्दुओं के उन पवित्र पर्वों में से एक है जिसे बड़ी ही श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। पंचांगानुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग यानी सर्प देवता की पूजा की जाती है। जिसमे सर्प का दूध से स्नान का खास महत्व होता है।

 

लेकिन बहुत से स्थानों पर इस दिन सर्पों को दूध पिलाने की परंपरा बना गयी है जो की बिलकुल गलत है। जी हां, नाग को कभी भी दूध नहीं पिलाना चाहिए। क्योंकि दूध उन्हें पचता नहीं है और इसके कारण उनकी मृत्यु हो जाती है। हमारे शास्त्रों में भी नागों को दूध पिलाने नहीं बल्कि दूध से स्नान कराने के बारे में कहा गया है। बहुत से गावों में इस दिन कुश्ती आदि की प्रतियोगिताएं का आयोजन होता है। जिसमे कई बड़े छोटे पहलवान भाग लेते है। इस दिन गाय, बैल आदि पशुओं में नदी आदि में नहलाने की परम्परा भी काफी पुरानी है।

 

नाग पंचमी का पर्व :-

सामान्यतौर पर नाग पंचमी हरियाली तीज के 2 दिन बाद ही आती है। जो हर साल जुलाई और अगस्त के महीनों में पड़ती है। नाग पंचमी के पर्व पर महिलाएं नाग देवता की पूजा करती है और अपने भाइयों और परिवारजनों की रक्षा के लिए प्रार्थना करती है।

 

इस दिन पुरे भारत में सर्प देवताओं के अलग-अलग स्वरूपों का पारंपरिक तरीकों से पूजन किया जाता है। ये सावन माह के महत्वपूर्ण दिनों में से एक मानी जाती है। माना जाता है नाग पंचमी के दिन सर्प देवता का पूजन करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। और वैसे भी सर्प को शिव जी के गले का आभूषण माना जाता है। ऐसे में सावन माह की नाग पंचमी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है जिनमे निम्निलिखित सम्मिलित है –

 

अनंता, वासुकी, शेष, कालिया, तक्षक, पिंगल, धृतराष्ट्र, कार्कोटक, पद्मनाभा, कंबाल, अश्वतारा और शंखपाल।

 

नाग पंचमी की पूजा के लिए मंत्र :

 

नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है जिसमें विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। मंत्र कुछ इस प्रकार है –

 

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।।

ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः।

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।

ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः।।

 

जिसका अर्थ है – जो नाग, पृथ्वी, आकाश, स्वर्ण, सूर्य की किरणों, सरोवरों, कूप तथा तालाब आदि में निवास करते हैं। वे सब हम पर प्रसन्न हों, हम उनको बार-बार नमस्कार करते हैं।

 

नाग पंचमी 2018

वर्ष 2018 में सावन माह की नाग पंचमी 15th अगस्त 2018, बुधवार को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त

सावन माह की नाग पंचमी पूजा का मुहूर्त = 05:54 से 08:30 तक।

मुहूर्त की अवधि = 02 घंटा 36 मिनट

 

सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का प्रारंभ 15 अगस्त 2018, बुधवार 03:27 AM पर होगा। 

जिसका समापन 16 अगस्त 2018, वीरवार 01:51 AM पर होगा।

 

Divya Jyoti Astro And Vaastu

Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja

ABOHAR\LUDHIANA