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इस बार 30 दिनों का है सावन

इस बार 30 दिनों का है सावन

 

 

हिंदु धर्म के लोगों साल के 12 माह कोई ना कोई त्योहार मानते हैं, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में सावन(श्रावस मास) के महीने को सबसे खास माना गया है. इस साल सावन(श्रावस मास) महीने की शुरुआत 27 जुलाई से हो रही है, लेकिन उदया तिथि यानि 28 को है इसलिए सावन(श्रावस मास) का महीना इसी दिन से शुरू होगा. इस साल सावन का महीना कई मायनों में खास है, क्योंकि 19 साल बाद एक दुर्लभ संयोग पड़ रहा है. इस साल सावन(श्रावस मास) का महीना 28, 29 नहीं बल्कि पूरे 30 दिनों का रहने वाला है. 

हिंदु पंचाग के मुताबिक, इस साल सावन(श्रावस मास) का महीने 30 दिन होने के पीछे अधिकमास है. 28 जुलाई को सावन का पहला दिन होगा जो कि 26 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा. सावन(श्रावस मास) के महीने में सोमवार के दिन का खास महत्व है. ऐसा कहा जाता है कि सोमवार को भगवान शिव का दिन होता है और सावन(श्रावस मास) के दिनों में शिवलिंग पर जल चढाने से साक्षात भगवान के दर्शन होते हैं

इस बार सावन में होंगे 4 सोमवार

इस बार सावन महीने में बड़ा ही शुभ योग बन रहा है. इस बार सावन माह में चार सोमवार हैं. सोमवार को बाबा भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक व उस दिन व्रत रखने तथा श्रद्धा भाव से पूजन अर्चन करने वाले आस्‍थावानों की मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं ऐसा शास्‍त्रों में भी उल्‍लेखित है. इस बार श्रावण मास में करोड़ सूर्यग्रहण के फल के बराबर ही फलदायी भौमवती अमावस्या भी पड़ने जा रही है. श्रावण मास में बाबा को भांग, बेल पत्र और दूध चढ़ाने से मनवांक्षित फल की प्राप्ति होती है. साथ ही गरीबों को दान देने से पुण्‍य फल मिलता है. हालांकि महादेव चूंकि बड़े ही भोले माने जाते हैं इसलिए मात्र सच्‍चे मन से शिवलिंग पर जल चढ़ाकर उन्‍हें रिझाया जा सकता है.

सावन मास को सर्वोत्तम मास कहा जाता है। यह 5 पौराणिक तथ्य बताते हैं कि क्यों सावन है सबसे खास... 

 1. मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी, जिससे मिली मंत्र शक्तियों के सामने मृत्यु के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।

 2. भगवान शिव को सावन का महीना प्रिय होने का अन्य कारण यह भी है कि भगवान शिव सावन के महीने में पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था। माना जाता है कि प्रत्येक वर्ष सावन माह में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है।

3. पौराणिक कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मथने के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की; लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम 'नीलकंठ महादेव' पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का ख़ास महत्व है। यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 

 4. 'शिवपुराण' में उल्लेख है कि भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है, जिसमें कोई संशय नहीं है।

 5. शास्त्रों में वर्णित है कि सावन महीने में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए ये समय भक्तों, साधु-संतों सभी के लिए अमूल्य होता है। यह चार महीनों में होने वाला एक वैदिक यज्ञ है, जो एक प्रकार का पौराणिक व्रत है, जिसे 'चौमासा' भी कहा जाता है; तत्पश्चात सृष्टि के संचालन का उत्तरदायित्व भगवान शिव ग्रहण करते हैं। इसलिए सावन के प्रधान देवता भगवान शिव बन जाते हैं।

 

Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja

Divya Jyoti Astro and Vaastu,

Abohar & Ludhiana