loading

About Us

ज्योतिष एक अटल सत्य

ज्योतिष एक अटल सत्य यह मैने अपने जीवन में होने वाली कई घटनाओ से जाना है l जिसकी कुछ यादे मै इस में संजो रहा हूँ मेरा जन्म 01.02.1972, 12:30, अबोहर में एक सादे परिवार में हुआ l जन्म से ही गूड रहस्य को जानने की मन में इच्छा रहती थी l जैसे तैसे मेरा बचपन गरीबी में बढ़ता गया l शिक्षा के क्षेत्र में अपने जीवन काल में कई स्कूल बदले यहा तक की पंजाब से राजस्थान तक और फिर वापिस पंजाब में आना पड़ा l

राजथान में मैंने उस जगह पर 2 वर्ष बिताए यहाँ पर कुएं के पास वहां के बजुर्ग लोग पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ कर आकाश को देख कर मोसम के अनुसार फसलों और उन के मुल्य की भाविश्वानी किया करते थे l मन में सवाल उठता था कि ये कैसे कर पाते हैं ? आज भी जब यह सोचता हूँ तो राजस्थान के उस शहर में जाने को बहुत मन करता है l पर समय का आभाव आड़े आता है l वापिस पंजाब में आने पर मैंने अपनी दसवीं तक कि पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने जीवन काल को बड़ी जल्दी बदलते देखा l फिर हाईस्कैनड्री कि पढ़ाई शुरू हुई तो उस समय के अन्तराल में मैंने अपने जीवन काल को जानने के लिए ज्योतिष का सहारा लेने कि सोची l

यही सोच मुझे किसी ज्योतिषी के पास ले गई ,पर जीवन का कोई हल नहीं निकला l जैसे तैसे पढ़ाई भी चलती रही और धन का आभाव व् धन मान कमाने कि लालसा भी बढती गई कोई रास्ता नजर नही आ रहा था l कई पंडित व् ज्योतिषियो के पास चक्र शुरू हो गये l धर्म में आस्था तो बचपन से ही थी कारण मेरे पिता शहर के कई मंदिरों से जुड़े हुए थे तो रात्रि में होने वाले जागरण में मेरा उन के साथ जाना भी होता था l पढ़ाई के साथ कमाई भी मेरा लक्ष्य था और अपने जीवन में चमत्कार होने कि आशा बहुत थी l पर ऐसा कुछ न हो सका तो मैंने उस समय के दोरान ही ज्योतिष में रूचि ली l धीरे धीरे इधर उधर से ज्ञान लेता रहा

किताबे खरीदने के आभाव के कारण मांग कर किताबें पढ़ता रहा l अपने हाथो से नोट्स लिखता रहा जैसे तैसे जीवन काल बीतता गया अपने टोने टोटके व् अधूरे ज्ञान के बल पर जितना हो सका मैंने अपना कुछ नाम व् धन भी कमाया किराये के मकान से अपने मकान में व् नोकरी से खुद के कारोबार में आने पर जीवन में कुछ अच्छा महसूस होने लगा उस समय में कोई बड़े बदलाव नहीं आए बल्कि कर्ज बढता गया और सब कुछ चोपट हो गया गुसे में मैंने इश्वर को न मानने व् धर्मो को झूठा समझ कर अपने लिखे सारे नोट्स जला डाले शायद वो मेरी भूल थी समय बीतता गया विवाह हुआ तो उस के बाद मेरे पहले बच्चे का जन्म हुआ हालात और भी ज्यादा खराब हो गये मकान भी जाता रहा और कारोबार भी ठप हो गया दुबारा मन में वही बात आई और सोचा खुद कुछ करके देखें के सच्चाई क्या है धर्म और ज्योतिष का ज्ञान बढ़ाने के चक्र में हर क्षेत्र में कार्य करने लगा l

क्या वास्तु क्या ज्योतिष क्या तंत्र मन्त्र आदि पर यहाँ तक कि कारोबार करते करते रत्नों का कारोबार राजस्थान के जयपुर से लाकर शुरू किया l मैं सपनो कि दुनिया में जीने लगा था l 1997-98 के दोरान ज्योतिष कि परिभाषा पूर्ण समझ आने लगी थी l तो सन 1999 में मेरे घर बेटे ने जन्म लिया उसके जन्म काल से पहले मैंने ज्योतिष का सहारा ले कर उस का जन्म अपने निकाले हुए समय के अनुसार डॉक्टर से बात कर सर्जरी से करवाया l यह मेरे जीवन का सब से बड़ा दिन था क्योकि अपने बच्चे के जन्म से पहले ही मैंने उसकी जन्म कुंडली बना ली थी और उस का व् अपना भविष्य देख कर समय का चयन किया बस क्या था धन व् मान का आभाव उस के जन्म के साथ ही ख़त्म हो गया l उस समय कि की गई भविष्यवानिया आज भी मुझे याद हैं बस 13.12.2000 को तो मैंने यह कार्य अपने बल बूते से शुरू किया उस के बाद से लेकर अब तक का समय कैसे बीत रहा है l यह सब जानते हैं इसी समय से ही मैंने ज्योतिष के बारे में अपनी पत्नी कंचन को ज्ञान दिया उन्होंने भी अपना ज्ञान बहुत बढ़ाया आज हम दोनों इस कार्य में लगे हुए हैं और नये नये शोध करते रहते हैं मेरा 30 वर्षों का अनुभव व् मेरी पत्नी कंचन का 13 वर्ष का अनुभव होने पर दोनों के अनुभवों को मिला कर हमने 06.10.2013 को लोगों के सामने वैदिक ज्योतिष के बहुत बड़े फलित के साथ जन्म कुंडली बनानी शुरू कि कुंडली तो पहले भी बनाते थे पर जो अब बनानी शुरू कि है वो अपने आप में एक आयना है जो इन्सान को उस कि असलियत खुद बताती है इस कार्य में लगे हुए हम दोनों लोगो के दुखों का निवारण करने कि पूरी कोशिश कर रहे हैं इश्वर भी हमारा साथ दे रहा है व् हमारे कर्म के साथ उन लोगों का सहयोग भी हमे बहुत है जो आज तक हमारे साथ हैं इस लिए हम इश्वर व उन लोगों का आभार मानते हैं l

 
 
Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja
Divya Jyoti Astro and Vaastu